वाराणसी : नवनीता कुंअर पब्लिक स्कूल में हिंदी दिवस पर साहित्यिक और सांस्कृतिक रंग, बच्चों की प्रतिभा से सजी महफ़िल

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वाराणसी। हिंदी दिवस के अवसर पर शनिवार को नवनीता कुंअर पब्लिक स्कूल, सुसुवाही के प्रांगण में रचनात्मक लेखन मंच न्यास, वाराणसी उपशाखा बरेली के सौजन्य से भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पण के साथ हुआ।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. पृथ्वीश नाग (पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ), विशिष्ट अतिथि एवं कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र प्रताप (वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ), वरिष्ठ अन्वेक्षक श्री हृदय नारायण सिंह (राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन, भारत सरकार, वाराणसी), विद्यालय प्रबंधक श्री राजेश कुमार राय, प्रधानाचार्य डॉ. दिवाकर राय, उपाध्यक्ष श्री प्रवीण राय तथा वरिष्ठ एवं कनिष्ठ समन्वयकगण मंचासीन रहे।

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कार्यक्रम की शुरुआत छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना नृत्य एवं स्वागत गान से हुई। हिंदी विभागाध्यक्ष ने अतिथियों का स्वागत भाषण दिया। इसके बाद विद्यालय के बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कृतार्थ ने प्रेरणादायी भाषण दिया और सक्षम पांडे ने “नमो नमो जय शंकर” गीत से सबका मन मोह लिया।

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बाल कवि सम्मेलन कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें नन्हे कवियों ने अपनी मौलिक रचनाओं के साथ सूरदास, कबीर, मीरा और तुलसी की अमर वाणी प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों ने “पहली और चित्र पहचानो” जैसे खेलों में अपनी मानसिक चपलता और भाषा-ज्ञान का परिचय दिया। हिंदी को राष्ट्रभाषा मान्यता देने के समर्थन में बच्चों ने नाट्य प्रस्तुति दी, जिससे बाल संसद की झलक देखने को मिली। तान्या, नैन्सी और वंशिका ने अपनी भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुतियों से खूब सराहना पाई।

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प्रधानाचार्य डॉ. दिवाकर राय ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी केवल भाषा ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति और संवाद की आत्मा है। बच्चों में बचपन से ही मातृभाषा के प्रति सम्मान और आस्था का बीज बोना आवश्यक है, ताकि वे आगे चलकर अपनी प्रगति का माध्यम हिंदी को बना सकें। मुख्य अतिथि डॉ. पृथ्वीश नाग ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि भले ही आज के दौर में अंग्रेजी का प्रभाव बढ़ा हो, किंतु आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा का सम्मान करना संस्कार की तरह अपनाना होगा। विशिष्ट अतिथि प्रो. सुरेंद्र प्रताप ने भी बच्चों को हिंदी को जीवन का आधार बनाने और भाषा के माध्यम से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम में रचनात्मक लेखन समिति द्वारा आमंत्रित कवियित्री मानवी सिंह ने भी अपने मनमोहक काव्य पाठ से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। निबंध और सुलेख प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का संचालन छात्राओं नैना और सृजल ने किया, जबकि शिक्षिका श्रीमती अंजू सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत कर समारोह का समापन किया।








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