CG Liquor Scam: ज्यूडिशियल रिमांड के बाद चैतन्य बघेल की कोर्ट में पेशी, ED ने दाखिल की 7 हजार पेज की चार्जशीट

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Chhattisgarh Liquor Scam Chaitanya Baghel Court Hearing: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की सोमवार,15 सितंबर को रायपुर में कोर्ट में पेशी हुई। ज्यूडिशियल रिमांड खत्म होने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान ED ने चैतन्य के खिलाफ 7 हजार से अधिक पेज की चार्जशीट पेश की।

EOW-ACB ने चैतन्य से पूछताछ के लिए किया था आवेदन

चैतन्य बघेल के वकील फैजल रिजवी ने बताया कि EOW-ACB ने चैतन्य से पूछताछ के लिए आवेदन किया था। इसी आधार पर उन्हें 12 और 13 सितंबर को पूछताछ की अनुमति दी गई थी। हमें पहले से इसका अंदेशा था कि EOW उन्हें गिरफ्तार कर सकती है, जिसके चलते चैतन्य ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले में लोअर कोर्ट में अग्रिम जमानत पर सुनवाई नहीं हो पाने तक प्रोडक्शन वारंट को स्थगित रखा जाए। इसके आधार पर वकील फैजल रिजवी ने EOW की रिमांड का विरोध किया था।

मामले में 16 सितंबर को सुनवाई

यहां बता दें, ED के मामले में चैतन्य बघेल को अभी भी ज्यूडिशियल रिमांड पर रखा गया है। सेशन कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर 2025 को करेगी। इसके अलावा आज हाईकोर्ट में चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी मामले में सुनवाई अधूरी रह गई। इस पर 19 सितंबर को फिर सुनवाई होगी। चैतन्य के खिलाफ शराब घोटाला, कोल लेवी, महादेव सट्टा ऐप और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच चल रही है।

ED ने चैतन्य को जन्मदिन पर किया था अरेस्ट

21 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) रायपुर जोनल कार्यालय की ओर से प्रेस नोट में दी गई जानकारी के मुताबिक, ईडी ने चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। शराब घोटाले की जांच ईडी ने IPC की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी।

शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपए की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई।

चैतन्य को घोटाले से 16.70 करोड़ मिले

ED की जांच से पता चला है कि चैतन्य बघेल को 16.70 करोड़ रुपए की पीओसी प्राप्त हुई थी। उन्होंने उक्त पीओसी को मिलाने के लिए अपनी रियल एस्टेट फर्मों का इस्तेमाल किया था। यह भी मालूम चला है कि उन्होंने पीओसी की उक्त नकद राशि का उपयोग अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के विकास में किया था। पीओसी का उपयोग उनके प्रोजेक्ट के ठेकेदार को नकद भुगतान, नकदी के खिलाफ बैंक प्रविष्टियों आदि के माध्यम से किया गया था। उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ भी मिलीभगत की और अपनी कंपनियों का उपयोग एक योजना तैयार करने के लिए किया। जिसके अनुसार उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर अपने “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैटों की खरीद की आड़ में अप्रत्यक्ष रूप से 5 करोड़ रुपए हासिल किए। बैंकिंग ट्रेल पता चला है कि लेन-देन की प्रारंभिक अवधि के दौरान, त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने अपने बैंक खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान प्राप्त किया।

1000 करोड़ से ज्यादा की अवैध संपत्ति का लेन-देन

इसके अलावा, सिंडिकेट पर शराब घोटाले से प्राप्त 1000 करोड़ रुपये से अधिक के पीओसी (POC) को संभालने का भी आरोप है।

वह छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उस समय के कोषाध्यक्ष को पीओसी ट्रांसफर करने के लिए अनवर ढेबर और अन्य के साथ मिलकर काम करते थे। ईडी की जांच में यह सामने आया है कि इस शराब घोटाले से मिली रकम को आगे निवेश के लिए बघेल परिवार के करीबी सहयोगियों को भी दे दिया गया था। इस रकम के अंतिम उपयोग की जांच अभी भी चल रही है।

गिरफ्त में हैं कई बड़े चेहरे

ईडी ने इससे पहले पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, ITS अरुण पति त्रिपाठी और पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक कवासी लखमा को इस मामले में गिरफ्तार किया था।

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चैतन्य ने HC में लगाई याचिका

चैतन्य बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में ED द्वारा उनकी गिरफ्तारी और हिरासत की कार्रवाई को चुनौती दी थी। याचिका में चैतन्य ने कहा था कि उनकी हिरासत गैरकानूनी है और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर, उन्हें पहले हाई कोर्ट जाने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने बिलासपुर हाई कोर्ट में ED की कार्रवाई के खिलाफ याचिका लगाई है।

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