वाराणसी : शारदीय नवरात्रि के पहले दिन को लेकर शैलपुत्रि मंदिर में विशेष तैयारियां, दर्शन के लिए उमड़ेगी भारी भीड़


वाराणसी। 22 सितंबर से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्रि को लेकर वाराणसी में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस नौ दिवसीय महापर्व में सबसे पहले मां शैलपुत्रि के दर्शन का विधान है, और इसके लिए शहर के अलईपुर क्षेत्र में स्थित प्राचीन शैलपुत्रि मंदिर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह मंदिर पूरे विश्व में अनोखा माना जाता है क्योंकि यहां स्वयं देवी शैलपुत्रि विराजमान हैं। माना जाता है कि भारत का कोई अन्य मंदिर ऐसा नहीं है जहां देवी खुद विराजमान हों।

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मंदिर का महत्व और विशेषताएँ
शैलपुत्रि मंदिर वाराणसी का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां देवी शैलपुत्रि के स्वयं विराजमान होने की मान्यता है। श्रद्धालु मानते हैं कि यहां दर्शन करने से स्थिरता, शांति, समृद्धि और उन्नति प्राप्त होती है। विशेष रूप से सुहागिन महिलाएँ पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए यहां पहुंचती हैं। नवरात्र के पहले दिन इस मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, इतने कि कभी-कभी मंदिर में पैर रखने की जगह भी नहीं होती।

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कैसे पहुँचें
वाराणसी जंक्शन (कैंट रेलवे स्टेशन) से मंदिर की दूरी लगभग 10-15 मिनट की है। श्रद्धालु ऑटो-रिक्शा, टैक्सी या स्थानीय बस के माध्यम से आसानी से अलईपुर पहुंच सकते हैं। शहर में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और साइकिल-रिक्शा की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है।

आस्था और पूजा विधि
माना जाता है कि नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्रि मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों को मां के नौ स्वरूपों के दर्शन का फल मिलता है। मंदिर में देवी को लाल फूल, चुनरी और नारियल अर्पित किया जाता है। यहाँ देवी की तीन बार आरती होती है और प्रसाद में हलवा-चना और मालपुआ का भोग लगाया जाता है।

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वाराणसी के अलईपुर क्षेत्र में स्थित यह प्राचीन मंदिर नवरात्र के अवसर पर विशेष रूप से सजाया जाता है और भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। इस वर्ष भी पहले दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की संभावना है, इसलिए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए हैं।

यह नवरात्रि, श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद और आस्था की यात्रा का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होने जा रहा है।

 








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