वाराणसी। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर केदारघाट स्थित करपात्री धाम में आयोजित तीन दिवसीय श्री विद्या कोटि कुमकुमार्चन महायज्ञ का विधिवत समापन हुआ। इस महायज्ञ का शुभारंभ रविवार को हुआ था, जिसकी अध्यक्षता स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने की। आयोजन में 1008 माताओं ने श्रद्धापूर्वक माता ललिता त्रिपुरसुंदरी की कुमकुम द्वारा पूजा-अर्चना कर भागीदारी निभाई।

समापन दिवस पर मंगलवार को माता ललिता त्रिपुरसुंदरी का विशेष श्रृंगार किया गया। इसके बाद महिलाओं ने पारंपरिक विधि से कुमकुमार्चन किया। स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती महाराज की देखरेख में सम्पन्न अनुष्ठान के दौरान वातावरण देवी भक्तिरस से सराबोर रहा। पूजा-अर्चना के बाद सामूहिक आरती हुई और तत्पश्चात भंडारा का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

करपात्री धाम के व्यवस्थापक राहुल ने बताया कि नवरात्रि में भगवती राजराजेश्वरी का विशेष पूजन परंपरागत रूप से किया जाता है। इस बार लगभग 1100 माताओं ने पूजन-अर्चन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि यह विशेष पूजा दक्षिण भारत की परंपरा है, जिसे करपात्री जी महाराज ने उत्तर भारत में स्थापित किया था। आज इस परंपरा को करपात्री धाम के पीठाधीश्वर स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती महाराज और उनके प्रतिनिधि अभिषेक ब्रह्मचारी जी महाराज आगे बढ़ा रहे हैं।

पूजन में शामिल महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि तीन दिवसीय कुमकुमार्चन महायज्ञ में सम्मिलित होकर उन्हें आत्मिक शांति और विशेष आनंद की अनुभूति हुई। कई महिलाओं ने बताया कि वे पहली बार इस अनुष्ठान में शामिल हुईं और उनके लिए यह अनुभव बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय रहा।
नवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस अनुष्ठान ने न केवल माताओं-बहनों को एकजुट कर देवी भक्ति का अवसर प्रदान किया, बल्कि दक्षिण भारत से आई इस परंपरा को उत्तर भारत की संस्कृति में और अधिक जीवंत करने का भी कार्य किया। श्रद्धालु महिलाएं इस आयोजन का हिस्सा बनकर स्वयं को धन्य महसूस करती रहीं।