Dussehra: सत्य की विजय हुई और असत्य का नाश हुआ। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में धूमधाम से दशहरा मनाया गया। भोपाल के ओल्ड कैंपियन ग्राउंड पर E-2 दशहरा उत्सव समिति ने मेघनाद, कुंभकर्ण, अक्षकुमार और रावण के पुतलों का दहन किया। इससे पहले भव्य चल समारोह निकाला गया।
तस्वीरों में E-2 दशहरा उत्सव

भोपाल की E-2 दशहरा उत्सव समिति 29 सालों से विजयादशमी का आयोजन करती आ रही है। इस साल भी सफल आयोजन हुआ। ओल्ड कैंपियन ग्राउंड में रावण दहन और भव्य आतिशबाजी हुई।


भोपाल की E-2 कॉलोनी में 1990 में एक छोटे से बालक पुष्पेंद्र सिंह मामू ने अपने हाथों से एक रावण का पुतला बनाया। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह एक साधारण शुरुआत भविष्य में एक भव्य और विशाल दशहरा उत्सव का रूप ले लेगी।



जैसे-जैसे समय बीता, इस आयोजन से लोग जुड़ते गए। संरक्षक के रूप में क्षेत्र के जननायक ध्रुव नारायण सिंह और समाजसेवी स्व. महेंद्र दुबे का मार्गदर्शन मिला। पुष्पराज सिंह परमार, मुनीन्द्र सिंह चौहान, पंकज पंत, प्रतीक ठाकुर जैसे उत्साही सदस्य इस समिति का हिस्सा बने और उन्होंने इस आयोजन को एक नई पहचान दी।


पूरे भोपाल और संभवतः समस्त भारत में एकमात्र दशहरा आयोजन है जिसमें विशाल चल समारोह और चार पुतलों रावण, कुंभकर्ण, मेघनाथ और अक्षकुमार के पुतलों का दहन होता है।




आज E-2 का दशहरा केवल एक सामान्य आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे भोपाल और संभवतः भारत में अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है। यह संभवतः भारत का एकमात्र ऐसा दशहरा है, जहां विशाल चल समारोह का आयोजन होता है, जिसमें रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद और अक्ष कुमार के पुतलों का दहन किया जाता है। इसके साथ ही दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देने वाली भव्य आतिशबाजी भी होती है।




इस आयोजन को और भी शानदार बनाने में बंसल ग्रुप और भास्कर समूह जैसे प्रतिष्ठित प्रायोजकों का महत्वपूर्ण योगदान है। एक बालक के छोटे से प्रयास ने किस तरह एक भव्य परंपरा का रूप ले लिया, यह E-2 के दशहरे की कहानी है।