UP: यूपी ने रचा कीर्तिमान… ‘डी-रेगुलेशन 1.0’ में देश में पहला स्थान

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उत्तर प्रदेश ने व्यापार सुधारों के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। योगी आदित्यनाथ सरकार के नेतृत्व में प्रदेश ने केंद्र सरकार के ‘डी-रेगुलेशन 1.0’ कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर में पहला पायदान हासिल किया है। यह उपलब्धि व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाने के लिए चिन्हित 23 प्राथमिक सुधारों के पूर्ण और प्रभावी क्रियान्वयन के आधार पर मिली है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सभी 23 सुधारों को पूरी तरह लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

केंद्र ने सराहे योगी सरकार के व्यापार सुधार

योगी सरकार द्वारा लागू किए गए व्यापक व्यापार सुधारों को भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर सराहा है। इस मूल्यांकन में उत्तर प्रदेश ने भूमि, भवन एवं निर्माण, श्रम, यूटिलिटीज और विभिन्न अनुमतियों से जुड़े पांच प्रमुख क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिससे राज्य का समग्र व्यापारिक माहौल अधिक भरोसेमंद और सुगम बना है।

भूमि सुधारों से निवेश को मिली नई रफ्तार

भूमि सुधारों के तहत प्रदेश में मिश्रित उपयोग विकास को बढ़ावा देने के लिए फ्लेक्सिबल जोनिंग फ्रेमवर्क अपनाया गया है। भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए न्यूनतम सड़क चौड़ाई मानकों का युक्तिकरण किया गया। साथ ही, जीआईएस आधारित औद्योगिक लैंड बैंक विकसित कर उसे इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक से जोड़ा गया, जिससे निवेशकों को पारदर्शी और सटीक जानकारी उपलब्ध हो सके।

भवन एवं निर्माण प्रक्रियाएं हुईं आसान

भवन और निर्माण क्षेत्र में सुधारों के तहत औद्योगिक एवं वाणिज्यिक भूखंडों में भूमि हानि को कम करने के लिए भवन विनियमों में संशोधन किए गए हैं। भवन स्वीकृतियों, संयुक्त निरीक्षण, अग्निशमन जांच तथा अधिभोग और पूर्णता प्रमाण पत्रों के ऑनलाइन निर्गमन में सूचीबद्ध तृतीय पक्ष संस्थाओं की भूमिका को सुदृढ़ किया गया है। इससे अनुमोदन की समय-सीमा में उल्लेखनीय कमी आई है।

श्रम सुधारों से बढ़ा रोजगार का दायरा

श्रम सुधारों के अंतर्गत कुछ जोखिमपूर्ण उद्योगों में महिलाओं के कार्य पर लगे प्रतिबंध हटाए गए हैं। कारखानों, दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में महिलाओं को रात्रिकालीन कार्य की अनुमति दी गई है तथा कार्य समय की सीमाओं का युक्तिकरण किया गया है। इसके अलावा, दुकान एवं स्थापना अधिनियम के अंतर्गत अनुपालन के लिए श्रमिकों की न्यूनतम सीमा बढ़ाकर 20 या उससे अधिक कर दी गई है।

डिजिटल प्रणालियों से तेज हुई स्वीकृति प्रक्रिया

प्रदेश में पर्यावरणीय स्वीकृतियों के लिए तृतीय पक्ष प्रमाणीकरण व्यवस्था लागू की गई है। कारखाना और व्यापार लाइसेंस की स्वीकृति को ऑनलाइन कर प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिजली और जल कनेक्शन की प्रक्रिया तेज की गई है, जबकि गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को श्वेत श्रेणी में पुनर्वर्गीकृत किया गया है।

सिंगल विंडो सिस्टम से मजबूत हुआ सुधार तंत्र

उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार (प्राविधानों में संशोधन) अधिनियम, 2025 लागू किया गया है। इसके तहत राज्य की सभी सेवाओं को राज्य सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से जोड़ा गया है। इन पहलों ने सुधारों के पूरे इकोसिस्टम को और अधिक प्रभावी बना दिया है।

निवेश-अनुकूल पहचान को मिली मजबूती

इन व्यापक और संरचनात्मक सुधारों के साथ उत्तर प्रदेश देश के सबसे प्रगतिशील और निवेश-अनुकूल राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है। योगी सरकार की प्रतिबद्धता और नीतिगत स्पष्टता के चलते प्रदेश एक सुदृढ़, पारदर्शी और विकासोन्मुख व्यापारिक वातावरण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

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