भोपाल में संविदा कर्मचारी-अधिकारी सम्मलेन: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा- ‘संविदा कर्मचारी हमारे हनुमान’
Bhopal Samvida Karmachari Adhikari Sammelan: भोपाल के दशहरा मैदान में शुक्रवार, 30 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में प्रदेश स्तरीय ‘संविदा कर्मचारी-अधिकारी सम्मलेन’ आयोजित किया गया।। इस अवसर पर 34 विभागों को मिलाकर मंच बनाया।
सीएम मोहन मादव कहा कि भगवान श्री राम को जैसे हनुमान की जरूरत है, वैसे ही सरकार को सभी संविदा कर्मचारियों की जरूरत है। उन्होंने कहा, मन से काम करने वालों का समूह संविदा कर्मचारी हैं। सरकार के साथ सभी संविदा कर्मचारियों के साथ ही प्रदेश आगे बढ़ता है।
सीएम ने कहा-संविदा कर्मचा​री का योगदान सराहनीय
सीएम मोहन यादव ने कहा, चाहे ईगवर्नेस हो, सरकारी आवास हो, स्वच्छ भारत मिशन हो, सभी विभागों में काम को अंजाम तक पहुंचाने के लिए संविदा कर्मचा​री का योगदान सराहनीय है। सीएम ने संविदा कर्मचारियों की तुलना हनुमान से की। साथ ही कहा, जैसे भगवान श्रीराम को हनुमान की जरूरत है वैसे ही सरकार को सभी संविदा कर्मचारी की जरूरत है।
संविदा कर्मियों की समस्याएं निपटाने बनेगी कमेटी
सीएम मोहन यादव ने कहा कि संविदा कर्मचारियों की समस्याएं निपटाने के लिए वित्त विभाग, जीएडी और संविदा कर्मचारियों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर सभी बातों पर निर्णय कर लें, उसके बाद यदि कोई समस्या आती है तो मैं बैठा हूं। इस मामले में संविदा कमचारी-अधिकारी संघ से जुड़े दिनेश तोमर ने बताया कि मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों की एक हाई पावर कमेटी बनाने की बात कही है, जो संविदा कर्मचारियों के नियमितिकरण से लेकर सभी समस्याओं पर फैसला करेगी।
/filters:format(webp)/bansal-news/media/media_files/2026/01/30/cm-mohan-yadav-2026-01-30-15-34-34.jpeg)
मुख्यमंत्री के सामने ये मांगे रखीं
-
10 वर्ष एवं इससे अधिक अनुभवी संविदा कर्मचारियों को नियमित पदों के विरुद्ध संविलियन करने के लिए समिति गठित की जाए।
-
संविदा कर्मचारियों का ग्रेड-पे निर्धारण किया जा चूका है। अतः उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI इंडेक्स के स्थान पर नियमित कर्मचारियों की तरह घोषणा दिनांक से महंगाई भत्ता ( DA) प्रदान किया जाए
-
सामान्य प्रशासन की संविदा नीति 2023 की सभी कंडिकाओं का केंद्र पोषित/राज्य पोषित समस्त योजनाओं/परियोजनाओ में अक्षरशः क्रियान्वयन किया जाए।
-
नियमित कर्मचारी के समान अर्जित अवकाश एवं मेडिकल अवकाश का प्रावधान किया जाए तथा यह अवकाश वर्ष के अंत में खत्म न हों। (वर्ष 2018 संविदा निति में दोनों ही अवकाश प्रदान किए गए थे जो कि संविदा निति 2023 में विलोपित कर दी गई)
-
संविदा निति 2023 के अनुसार समस्त विभागों में NPS, ग्रेजुटी, स्वास्थ्य बिमा लाभ, अनुकम्पा नियुक्ति केंद्र पोषित/राज्य पोषित समस्त योजनाओं/परियोजनाओं एक साथ क्रियान्वयन का आदेश जारी किया जाए एवं संविदा कर्मचारियों को दंड के प्रावधान CCA रुल 1965, 1966 पुर्णतः लागू किया जाए।
-
सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से कंडिका 9.8, 6.2 एवं कंडिका 11.5 विलोपित किया जाए एवं संविदा शोषित नवीनीकरण/मूल्यांकन जैसी व्यवस्था को बंद किया जाए।
-
वरिष्ठ पद रिक्त होने की स्थिति में अनुभवी संविदा कर्मचारी को पद प्रमोशन/अतिरिक्त चार्ज की पात्रता प्रदान की जाए एवं प्रतिनियुक्ति पर अन्य विभाग में जाने की अनुमति प्रदान की जाए।
-
किसी कारणवश कोई योजना समाप्त की जाती है तो उसके अंतर्गत कार्यरत समस्त संविदा कर्मचारियों को अन्य योजना में समकक्ष पद पर नियुक्ति देने का प्रावधान किया जाए।
ग्रेच्युटी, अनुकंपा नियुक्ति, NPS और 100 प्रतिशत वेतनमान अभी तक नहीं मिला
सम्मेलन में संयुक्त कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव को सौंपे आवेदन में बताया कि 4 जुलाई 2023 को आयोजित महापंचायत में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने ग्रेच्युटी, अनुकंपा नियुक्ति, NPS, 100 प्रतिशत वेतनमान आदि दिए जाने का आश्वाशन दिया गया, जो आज दिनांक तक लागू नहीं हो पाया।
-
जम्बूरी मैदान में किए जाने वाले कार्यक्रम में लगभग 50 हजार संविदा कर्मचारी एकत्रित हुए। जम्बूरी मैदान में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा के बाद संविदा नीति 2018 की नीति बनाई। जिसमें कि 90 प्रतिशत वेतनमान आदि विषय दिए गए।
-
दिनांक 04 जुलाई 2023 को महापंचायत का आयोजन हुआ। जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा 22 जुलाई 2023 को संविदा नीति 2023 प्राप्त हुई। जिसमें ग्रेच्युटी, अनुकंपा नियुक्ति, NPS, 100 प्रतिशत वेतनमान आदि दिए जाने का आश्वाशन दिया गया, जो आज दिनांक तक लागू नहीं हो पाया।
-
वर्तमान की स्थिति में समकक्षता निर्धारित की गई, जिसमें पदवार ग्रे-पे, वेतनमान कम कर दिया गया। अप्रेजल जैसी व्यवस्था जोड़ दी गई।
-
कुछ विभागों जैसे कृषि, ई-गवर्नेस आदि में समकक्षता का निर्धारण ही नहीं किया गया।
-
अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी गई, जिससे दुर्घटनाग्रस्त हुए हमारे लगभग 116 परिवार इससे वंचित हैं।
-
रिटायरमेंट के बाद ग्रेच्युटी नहीं दी गई है।
‘बड़ी उम्मीद थी…मुख्यमंत्री कोई घोषणा करेंगे’
/filters:format(webp)/bansal-news/media/media_files/2026/01/30/ramesh-rathor-2026-01-30-16-57-50.jpg)
मध्यप्रदेश संविदा कर्मचारी-अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने कहा कि बड़ी उम्मीद थी कि आज यानी 30 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री संविदा कर्मियों की मुख्य मांग- नियमितिकरण समेत ग्रेच्युटी, अनुकंपा नियुक्ति, NPS, 100 प्रतिशत वेतनमान पर कोई फैसला होगा, लेकिन ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई। संविदा नीति 2023 का ही यहां पालन नहीं हुआ। तो बिंदु लागू नहीं हुए उन्हीं के बारे में चर्चा हुई है। संविदा कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें नियमित किया जाना चाहिए। संविदा कर्मियों को नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता आदि सहित सभी सुविधाएं मिलना चाहिए। संविदा कर्मियों को 20-25 साल हो गए।
एक तरफ मप्र शासन सरेंडर करने वाले नक्सलियों को सरकारी नौकरी और सारी सुविधाएं दे रहा है। जबकि संविदा कर्मचारी तो पढ़े-लिखे और अनुभवी हैं, उन्हें तो नियमित करते हुए समस्त सुविधाएं मिलना चाहिए।
ये भी पढ़ें: वानिकी सम्मेलन, IFS मीट: सीएम मोहन यादव ने किया आईएफएस थीम गीत का विमोचन, कहा- फॉरेस्ट में सबसे अच्छी ग्रोथ