कांच की जगह प्लास्टिक बोतल में शराब बिक्री का फैसला: छत्तीसगढ़ बॉटलिंग संगठन ने जताया विरोध, कहा- पेट पर लात पड़ेगी, स्वास्थ्य पर भी खतरा

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Chhattisgarh Liquor Policy: छत्तीसगढ़ में शराब नीति को लेकर एक साथ कई बड़े बदलाव सामने आए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने शराब पर संशोधित आबकारी ड्यूटी की अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना के अनुसार नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी। इसके बाद राज्य में देसी शराब, विदेशी शराब और बीयर की कीमतों में बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है।

सरकार के इस फैसले का असर सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। नई ड्यूटी संरचना के तहत विदेशी शराब पर टैक्स को रिटेल सेल प्राइस यानी बाजार मूल्य के स्लैब से जोड़ा गया है। वहीं देसी शराब, बीयर और रेडी-टू-ड्रिंक पेय पदार्थों पर भी अतिरिक्त टैक्स लगाया गया है।

प्लास्टिक बोतल में बिकेगी शराब

कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ सरकार ने नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत एक और बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य की सरकारी शराब दुकानों में शराब कांच की बोतल के बजाय प्लास्टिक बोतल में बेची जाएगी। सरकार का तर्क है कि इससे ट्रांसपोर्ट आसान होगा, बोतल टूटने से होने वाला नुकसान कम होगा और कुल लागत में भी कमी आएगी।

हालांकि, इस फैसले को लेकर न केवल कारोबारी वर्ग बल्कि सामाजिक और पर्यावरण से जुड़े संगठन भी सवाल उठा रहे हैं।

दुर्ग में बॉटलिंग संगठन का विरोध

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कांच की जगह प्लास्टिक बोतल लाने के निर्णय से दुर्ग में छत्तीसगढ़ बॉटलिंग संगठन और बोतल बीनने से जुड़े लोगों में नाराजगी देखी गई। संगठन के सदस्य, जिनमें महिलाएं और दिव्यांग भी शामिल थे, कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर परिसर में घंटों धरना दिया और सरकार के फैसले को “गरीब-विरोधी” करार दिया। उनका कहना था कि कांच की बोतलों के बंद होने से बोतल बीनने वाले हजारों लोगों की आजीविका पर सीधा संकट आएगा। प्रदर्शन के दौरान “प्लास्टिक हटाओ, देश बचाओ” जैसे नारे भी लगाए गए।

पर्यावरण और रोजगार पर चिंता

बॉटलिंग संगठन का कहना है कि कांच की बोतलें रिसाइकिल होकर दोबारा इस्तेमाल होती हैं, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान होता है। वहीं प्लास्टिक बोतलें पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ा सकती हैं। साथ ही, कांच की बोतलों से जुड़े कामगारों और बोतल बीनने वालों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

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विशेषज्ञों के अनुसार शराब जैसे उच्च-एल्कोहल वाले तरल पदार्थ जब प्लास्टिक के संपर्क में आते हैं, तो प्लास्टिक से कुछ रसायन शराब में घुल सकते हैं। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि अल्कोहल प्लास्टिक की कुछ किस्मों को कमजोर कर देता है, जिससे फथैलेट्स जैसे रसायन बाहर निकल सकते हैं।

ये रसायन शरीर में प्रवेश करने पर हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं और लंबे समय तक सेवन से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, प्लास्टिक में मौजूद कुछ तत्व धीरे-धीरे शराब में मिलकर उसके स्वाद और गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से कई विशेषज्ञ शराब को लंबे समय तक प्लास्टिक में रखने को सुरक्षित नहीं मानते।

सरकार के फैसले पर बढ़ता दबाव

एक तरफ जहां सरकार राजस्व बढ़ाने और लागत घटाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य से जुड़े सवाल लगातार उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस विरोध और चिंताओं पर क्या रुख अपनाती है और क्या नीति में कोई संशोधन किया जाता है।

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