‘चूहों ने धान खा लिया’ बयान पड़ गया भारी: कवर्धा में 7 करोड़ के धान घोटाला मामले में कार्रवाई, डीएमओ अभिषेक मिश्रा सस्पेंड

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Kawardha Paddy Scam: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में सामने आए बहुचर्चित धान घोटाले ने अब प्रशासनिक कार्रवाई का रूप ले लिया है। ‘7 करोड़ रुपये के सरकारी धान को चूहों द्वारा खा लिए जाने’ वाले बयान से सुर्खियों में आए जिला विपणन अधिकारी (DMO) अभिषेक मिश्रा को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित द्वारा की गई है।

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विभाग की छवि धूमिल करने का आरोप

निलंबन आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि डीएमओ अभिषेक मिश्रा ने मीडिया के सामने तथ्यों की समुचित पुष्टि किए बिना गलत और भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की। इससे न केवल विपणन संघ, बल्कि छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन की छवि धूमिल हुई है। इसे विपणन सहकारी संघ कर्मचारी सेवा नियमावली की कंडिका-18 का उल्लंघन माना गया है। इसी आधार पर सेवा नियम की कंडिका-27 (1) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।

देखें आदेश की कॉपी-

क्या है पूरा धान कमी का मामला

दरअसल, विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदे गए धान का भंडारण जिले के दो प्रमुख संग्रहण केंद्रों में किया गया था। ये केंद्र बाजार चारभाठा और बघर्रा हैं। इन दोनों केंद्रों में कुल करीब 7 लाख 99 हजार क्विंटल धान संग्रहित किया गया था।

जब धान का उठाव होने के बाद स्टॉक का मिलान किया गया, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। दोनों केंद्रों से कुल 26 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई। इनमें अकेले बाजार चारभाठा संग्रहण केंद्र से लगभग 22 हजार क्विंटल धान गायब मिला, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 7 करोड़ रुपये बताई गई।

‘चूहों और कीड़ों’ वाला बयान बना विवाद की जड़

धान की इस बड़ी कमी पर डीएमओ अभिषेक मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि संग्रहण केंद्र प्रभारी प्रितेश पांडेय को हटा दिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि जो धान कम हुआ है, वह मौसम के प्रभाव और चूहे, दीमक व कीड़ों द्वारा नुकसान के कारण हुआ है।

उन्होंने यहां तक कहा था कि पूरे प्रदेश के 65 संग्रहण केंद्रों की तुलना में कवर्धा जिले की स्थिति बेहतर है। यही बयान बाद में उनके लिए सबसे बड़ा संकट बन गया।

रायपुर से जारी हुआ निलंबन आदेश

डीएमओ अभिषेक मिश्रा के निलंबन का आदेश रायपुर स्थित विपणन संघ के प्रबंध निदेशक (MD) की ओर से जारी किया गया। आदेश में कहा गया है कि बिना ठोस तथ्यों के इस तरह का बयान देना गंभीर अनुशासनहीनता है।

निलंबन अवधि के दौरान अभिषेक मिश्रा का मुख्यालय जिला विपणन कार्यालय बिलासपुर निर्धारित किया गया है। उन्हें इस दौरान नियमानुसार निर्वाह भत्ता देने की पात्रता रहेगी।

प्रशासनिक हलकों में हलचल

इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। धान खरीदी और भंडारण से जुड़ी व्यवस्था पहले ही सवालों के घेरे में रही है। अब इतने बड़े पैमाने पर धान की कमी और उस पर दिए गए बयान ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आगे की जांच पर टिकी नजर

हालांकि निलंबन के साथ यह मामला खत्म नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि धान की कमी को लेकर आगे विस्तृत जांच होगी और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर और भी कार्रवाई संभव है। यह मामला आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।

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