छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियां अब नगर निगमों को सौपी जाएंगी, निवासियों को दोहरे टैक्स से मिलेगी राहत
Chhattisgarh Housing Board Colony: छत्तीसगढ़ सरकार ने शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी व्यावहारिक समस्या के समाधान की दिशा में अहम कदम उठाया है। विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया कि हाउसिंग बोर्ड और रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित और पूरी हो चुकी 35 आवासीय कॉलोनियों को संबंधित नगर निगमों और नगर पालिकाओं को सौंपा जाएगा।
अब तक इन कॉलोनियों का नगरीय निकायों को औपचारिक हस्तांतरण नहीं हो पाया था। इसके कारण वहां रहने वाले लोगों को पानी, सड़क, सफाई, स्ट्रीट लाइट और नियमित रखरखाव जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह नहीं मिल पा रही थीं। कई कॉलोनियों में नागरिक सुविधाएं अस्थायी व्यवस्था के भरोसे चल रही थीं, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही थी।
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निवासियों पर था दोहरा आर्थिक बोझ
कॉलोनियों के हस्तांतरण न होने से सबसे बड़ी परेशानी आर्थिक बोझ को लेकर थी। निवासियों को एक ओर नगर निगम या नगर पालिका को संपत्ति कर देना पड़ता था, वहीं दूसरी ओर हाउसिंग बोर्ड या विकास प्राधिकरण को रखरखाव शुल्क भी चुकाना पड़ता था। इस दोहरे भुगतान को लेकर लंबे समय से लोग नाराजगी जताते आ रहे थे।
कैबिनेट फैसले से मिलेगी सीधी राहत
मंत्रिपरिषद के इस निर्णय के बाद अब इन कॉलोनियों का रखरखाव सीधे नगरीय निकायों के जिम्मे होगा। इसका मतलब यह है कि नगर निगम और नगर पालिकाएं इन क्षेत्रों में नियमित रूप से पानी आपूर्ति, सड़क मरम्मत, नालियों की सफाई, कचरा प्रबंधन और स्ट्रीट लाइट जैसी सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगी। इससे निवासियों को अतिरिक्त रखरखाव शुल्क से भी राहत मिलेगी।
सरकार ने साफ किया है कि हस्तांतरण के दायरे में कॉलोनियों के खुले भू-खंड, उद्यान, सड़कें और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं शामिल होंगी। हालांकि, आवासीय, व्यावसायिक और अर्द्धसार्वजनिक बिक्री योग्य संपत्तियों को इस हस्तांतरण से बाहर रखा गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि संपत्ति से जुड़े कानूनी और व्यावसायिक मामलों में कोई भ्रम न रहे।
शहरी प्रशासन होगा अधिक जवाबदेह
नगरीय प्रशासन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से शहरी शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनेगी। जब कॉलोनियां सीधे नगर निगमों के अधीन होंगी, तो नागरिक सुविधाओं को लेकर जवाबदेही तय करना आसान होगा। इसके साथ ही विकास कार्यों की योजना और क्रियान्वयन में भी तेजी आएगी।
इस निर्णय को सरकार की उस मंशा के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें वह शहरी जीवन की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दे रही है। बढ़ती शहरी आबादी के बीच बुनियादी सुविधाओं का सुचारू प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में कॉलोनियों को नगरीय निकायों को सौंपना एक व्यावहारिक और दीर्घकालिक समाधान माना जा रहा है।
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