प्रदेश में मेडिकल शिक्षा को नई गति: नए मेडिकल कॉलेजों से बढ़ी डॉक्टरों की संख्या, स्वास्थ्य सेवाएं हुईं मजबूत

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वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को लेकर सरकार के प्रयासों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि योजनाबद्ध ढंग से किए गए प्रयासों का सकारात्मक असर अब प्रदेश के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

मेडिकल कॉलेजों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि

वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 तक प्रदेश में कुल 36 मेडिकल कॉलेज संचालित थे, जिनमें 15 राजकीय और 21 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल थे। इसके बाद सरकार ने मेडिकल शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़े स्तर पर नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की। परिणामस्वरूप वर्ष 2025 के अंत तक प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 81 हो गई है। इनमें 45 राजकीय और 36 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। मेडिकल कॉलेजों की इस ऐतिहासिक वृद्धि से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बेहतर हुई है, बल्कि हर वर्ष बड़ी संख्या में नए डॉक्टर तैयार होकर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

चिकित्सा शिक्षा में एकरूपता के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना

वित्त मंत्री ने बताया कि मेडिकल और डेंटल शिक्षा के पाठ्यक्रमों एवं परीक्षाओं में समानता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अटल बिहारी वाजपेयी राज्य चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। इससे प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और विद्यार्थियों को एक सुव्यवस्थित शैक्षणिक ढांचा उपलब्ध हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं

प्रदेश सरकार ने ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा शुरू की है। वर्तमान में प्रदेश के 54 जनपदों में 170 मोबाइल मेडिकल यूनिट का संचालन किया जा रहा है। इन यूनिट्स के माध्यम से अब तक 2.05 करोड़ से अधिक मरीजों का उपचार किया जा चुका है। यह पहल उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है, जिन्हें दूर-दराज के क्षेत्रों से अस्पतालों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

टेली मेडिसिन से घर बैठे इलाज की सुविधा

आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए प्रदेश में टेली मेडिसिन सेवाओं का भी तेजी से विस्तार किया गया है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 11 मई 2021 से ई-संजीवनी टेली परामर्श सेवा शुरू की गई। वर्तमान में यह सेवा प्रदेश के 26 मेडिकल कॉलेजों में संचालित है, जिसके माध्यम से अब तक 22,53,320 से अधिक ओपीडी परामर्श प्रदान किए जा चुके हैं। इससे मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेने की सुविधा मिली है और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में प्रस्तुत आंकड़े यह दर्शाते हैं कि उत्तर प्रदेश में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से न केवल डॉक्टरों की संख्या बढ़ी है, बल्कि आम जनता तक बेहतर और सुलभ चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने की दिशा में भी मजबूत आधार तैयार हुआ है।

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