MP Budget: GDP ग्रोथ के बाद अब भोपाल कैपिटल रीजन का रीडेवलपमेंट जरूरी, जानें बजट पर और क्या बोले क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक

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MP Budget: मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट 2026-27 पेश किया। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने कहा कि क्रेडाई भोपाल मध्यप्रदेश बजट 2026-27 में युवा, महिला, किसान, श्रमिक और कनेक्टिविटी पर फोकस का स्वागत करता है। राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक 2025-26 में प्रदेश का जीडीएसपी करंट प्राइस लगभग 16,69,750 करोड़ रुपये और वृद्धि 11.14% अनुमानित है। रियल ग्रोथ 8.04% तथा प्रति व्यक्ति आय 1,69,050 लाख बताई गई है यह मजबूत संकेत है कि अब निवेश और रोजगार के लिए ‘डिलीवरी मोड’ जरूरी है।  

बजट घोषणाओं में लाड़ली बहना के लिए 23,882 करोड़ और 1 लाख सोलर पंप जैसे कदम सामाजिक सुरक्षा और ऊर्जा बदलाव को सहारा देंगे। ग्रामीण कनेक्टिविटी के लिए 21,630 करोड़ की सड़क योजना भी मांग-आपूर्ति की चेन को मजबूत करेगी।  

घोषणा नहीं सेवा गुणवत्ता से मापी जाएगी सफलता

बजट में शहरी विकास के लिए 21,000 करोड़ का प्रावधान एक बड़ा अवसर है, पर इसकी असली सफलता ‘घोषणा’ नहीं, सेवा-गुणवत्ता से मापी जाएगी। राजधानी क्षेत्र में पानी, सीवर, ड्रेनेज, ट्रैफिक और सार्वजनिक परिवहन का दबाव लगातार बढ़ रहा है, इसलिए इस राशि का बड़ा हिस्सा ट्रंक इन्फ्रा, मेट्रो-ई-बस इंटीग्रेशन और कोर एरिया रीडेवलपमेंट के लिए टाइम-बाउंड प्रोजेक्ट पाइपलाइन में जाना चाहिए। हम मांग करते हैं कि बजट के साथ ही प्रोजेक्ट-वाइज आउटपुट (कितने किलोमीटर पाइपलाइन/ड्रेनेज, कितने वार्ड कवर, कितने रीडेवलपमेंट पैकेज) और डिलीवरी टाइमलाइन सार्वजनिक की जाए, ताकि भोपाल मेट्रोपॉलिटन कैपिटल रीजन में ‘ईज ऑफ लिविंग’ वास्तव में ‘ईज ऑफ अर्निंग’ में बदले।

लेकिन रियल एस्टेट और शहरी रोजगार के लिए सबसे बड़ा गैप ‘अफोर्डेबल हाउसिंग’ और शहरों की मूल सुविधाओं पानी, सीवर, ड्रेनेज, ट्रांसपोर्ट की स्पीड और क्वालिटी है।

मेट्रोपॉलिटन रीजन फोकस पर हमारी 3 प्रमुख मांग

1. भोपाल-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए ट्रंक इन्फ्रा + ट्रांजिट-लिंक्ड डेवलपमेंट की स्पष्ट, टाइम-बाउंड पाइपलाइन।  

2. राजधानी भोपाल के लिए ‘कैपिटल रीडेवलपमेंट पैकेज’ पुराने क्षेत्रों का रिन्युअल, सरकारी और सार्वजनिक जमीन का बेहतर उपयोग और नगर निकाय की आय बढ़ाने के उपाय।

3. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: ऑनलाइन मंजूरी, तय समय-सीमा और नियमों की स्थिरता ताकि होल्डिंग कॉस्ट घटे और घर खरीदार को फायदा मिले।

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‘ईज ऑफ लिविंग’ से आगे ‘ईज ऑफ अर्निंग’ की मांग

प्रदेश की ग्रोथ के डेटा अब ‘ईज ऑफ लिविंग’ से आगे ‘ईज ऑफ अर्निंग’ की मांग कर रहे हैं और इसकी धुरी भोपाल मेट्रोपॉलिटन कैपिटल रीजन बन सकता है।

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