MP 27% OBC Reservation Case: मप्र में 3 महीने में होगा 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण मामले का फैसला, हाईकोर्ट में स्पेशल बेंच करेगी सुनवाई, SC का आदेश जारी
MP 27 percent OBC Reservation Case: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई 3 महीने में पूरी करके फैसला देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। मामले की सुनवाई पूरी करने के लिए MP हाईकोर्ट में स्पेशल बेंच बनाई जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
/filters:format(webp)/bansal-news/media/media_files/2026/02/20/mp-27-percent-obc-reservation-case-news-2026-02-20-22-05-09.jpg)
सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दिया कोई ओपिनियन
सुप्रीम कोर्ट ने आधिकारिक आदेश में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को 3 महीने में स्पेशल बेंच बनाकर इस केस को डिस्पोजल करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तरफ से इस केस में कोई ओपिनियन नहीं दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने MP हाईकोर्ट ट्रांसफर किया केस
सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से जुड़े सभी मामले वापस हाईकोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को कहा है कि इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष बेंच का गठन कर वरीयता के आधार पर 3 माह में निराकरण करें। छत्तीसगढ़ राज्य के मामलो में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 मई 2023 को पारित अंतरिम आदेश में 50 फीसदी की सीमा से ज्यादा 68 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की अनुमति प्रदान की गई है।
13% अतिरिक्त कोटे पर लगी रोक जारी रहेगी
19 फरवरी को 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं को वापस मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर हाईकोर्ट) ट्रांसफर कर दिया था। साथ ही बढ़े हुए 13 प्रतिशत OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट की पुरानी अंतरिम रोक फिलहाल जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि हाईकोर्ट ही इस आरक्षण कानून की संवैधानिकता और कानूनी वैधता की विस्तृत जांच करेगा। 13% अतिरिक्त कोटे पर लगी रोक जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार चाहे तो उसी अंतरिम आदेश की अवधारणा के अनुक्रम में आरक्षण लागू कर सकती है। दरअसल, राज्य सरकार ने पूर्व में सभी पदों पर सार्वजनिक रोजगार में ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था। इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में इसके विरोध और पक्ष में कई याचिकाएं दायर हुईं। बाद में सरकार ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े अधिकतर मामले सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर करा लिए। ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, वरुण ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह ने पक्ष रखा तथा मध्य प्रदेश शासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केएम नटराज तथा धीरेन्द्र सिंह परमार ने पक्ष रखा था।