नई दिल्ली: कानून के समक्ष समानता, लैंगिक निष्पक्षता और पुरुषों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर आवाज देने की दिशा में सक्रिय Nyay Prayaas Foundation अपने चौथे नेशनल कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन करने जा रहा है। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की थीम ‘Justice in Viksit Bharat – Reimagining Rule of Law’ रखी गई है।
यह कार्यक्रम 28 और 29 नवंबर 2026 को कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित The Chancery Pavilion में आयोजित होगा। सम्मेलन के माध्यम से न्याय व्यवस्था में सुधार, Gender Neutral Laws, पुरुषों के अधिकार, Parental Alienation और विकसित भारत के निर्माण में कानून के शासन (Rule of Law) की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
न्याय और कानूनी सुधारों पर केंद्रित रहेगा सम्मेलन
भारत में न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, निष्पक्ष और सुलभ बनाने के लिए कानूनी सुधारों तथा नागरिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर लगातार चर्चा होती रही है। इसी दिशा में Nyay Prayaas Foundation का चौथा नेशनल कॉन्क्लेव न्याय व्यवस्था के भविष्य और कानून के शासन की अवधारणा पर नए दृष्टिकोण विकसित करने का एक प्रयास है।
इस आयोजन में देशभर के विधि विशेषज्ञों, अधिवक्ताओं और कानून एवं न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों की सहभागिता को लेकर आमंत्रण दिया गया है। सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न कानूनी और सामाजिक मुद्दों पर संवाद को बढ़ावा देना तथा न्याय व्यवस्था को लेकर सार्थक विचारों का आदान-प्रदान करना है।
Gender Neutral Laws और पुरुषों के अधिकारों की आवाज उठाता है Nyay Prayaas Foundation
Nyay Prayaas Foundation की प्रमुख विचारधारा में Gender Neutral Laws और पुरुषों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को विशेष स्थान प्राप्त है। फाउंडेशन का मानना है कि न्याय व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति को समानता, निष्पक्षता और न्याय पाने का अधिकार मिलना चाहिए।
संगठन पुरुषों के सामने आने वाली कानूनी, सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियों को सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाने के लिए प्रयासरत है। विशेष रूप से वैवाहिक विवादों, पारिवारिक मामलों और आपराधिक कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में पुरुषों की समस्याओं को सामने लाना तथा उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
फाउंडेशन Gender Neutral Laws की आवश्यकता पर जोर देता है, ताकि कानून और न्यायिक प्रक्रियाओं में किसी भी व्यक्ति के साथ केवल उसके लिंग के आधार पर भेदभाव न हो। संगठन का उद्देश्य पुरुषों को कानूनी जानकारी, उचित मार्गदर्शन और आत्मविश्वास प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाना है।
इसका दृष्टिकोण किसी एक वर्ग के अधिकारों को दूसरे वर्ग के विरुद्ध खड़ा करना नहीं, बल्कि कानून के समक्ष समानता और निष्पक्ष न्याय की अवधारणा को मजबूत करना है।
Parental Alienation: बच्चों और माता-पिता के रिश्तों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा
Nyay Prayaas Foundation जिन महत्वपूर्ण सामाजिक और पारिवारिक मुद्दों पर आवाज उठाता है, उनमें Parental Alienation भी शामिल है।
Parental Alienation एक ऐसी स्थिति से जुड़ा शब्द है, जिसमें माता-पिता के बीच विवाद या अलगाव के दौरान बच्चा किसी एक अभिभावक से भावनात्मक अथवा अन्य कारणों से दूर हो सकता है। कई मामलों में बच्चों और माता-पिता के बीच संबंध प्रभावित होते हैं, जिसका असर परिवार की सामाजिक और भावनात्मक स्थिति पर भी पड़ सकता है।
फाउंडेशन इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने और ऐसे मामलों में बच्चों के हित, दोनों अभिभावकों के अधिकार तथा पारिवारिक संबंधों के महत्व को चर्चा के केंद्र में लाने की दिशा में काम करता है।
संगठन का मानना है कि वैवाहिक विवादों का असर बच्चों के भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए और ऐसे मामलों में बच्चों के कल्याण तथा उनके हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
कानूनी जागरूकता और पुरुषों को सशक्त बनाने की पहल
Nyay Prayaas Foundation केवल पुरुषों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी जागरूकता और लोगों को न्यायिक प्रक्रिया समझने में सक्षम बनाने पर भी जोर देता है।
संगठन के प्रमुख कार्यक्षेत्रों में कानूनी शिक्षा, मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता, कानूनी शोध, प्रारंभिक कानूनी मार्गदर्शन और Party-in-Person के रूप में स्वयं अदालत में अपना पक्ष रखने की प्रक्रिया को समझने में सहायता करना शामिल है।
फाउंडेशन का प्रयास है कि कानूनी जानकारी के अभाव में कोई भी व्यक्ति अपने अधिकारों और उपलब्ध कानूनी विकल्पों से अनजान न रहे। इसके माध्यम से लोगों को आत्मनिर्भर बनाने और न्यायिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है।
विकसित भारत के निर्माण में न्याय व्यवस्था की अहम भूमिका
किसी भी विकसित राष्ट्र की पहचान केवल उसकी आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि वहां की न्याय व्यवस्था, नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से भी होती है।
‘Justice in Viksit Bharat – Reimagining Rule of Law’ की थीम इसी विचार को सामने रखती है कि विकसित भारत के निर्माण के लिए एक ऐसी न्याय व्यवस्था आवश्यक है, जहां प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार और निष्पक्ष न्याय प्राप्त करने का अवसर मिले।
कानून का शासन, लैंगिक निष्पक्षता, मानवाधिकारों का संरक्षण और न्याय तक समान पहुंच जैसे विषय किसी भी मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं।
Nyay Prayaas Foundation का चौथा नेशनल कॉन्क्लेव इन्हीं विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर संवाद और विचार-विमर्श को आगे बढ़ाने की पहल है।
कब और कहां होगा Nyay Prayaas Foundation National Conclave 2026?
आगामी राष्ट्रीय सम्मेलन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी इस प्रकार है:
- आयोजक: Nyay Prayaas Foundation
- कार्यक्रम: 4th National Conclave – 2026
- मुख्य थीम: Justice in Viksit Bharat – Reimagining Rule of Law
- तारीख: 28 और 29 नवंबर 2026
- स्थान: The Chancery Pavilion, Bengaluru, Karnataka
यह दो दिवसीय सम्मेलन न्याय, कानूनी सुधार, Gender Neutral Laws, Men’s Rights और Parental Alienation जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा करने का अवसर प्रदान करेगा।
निष्पक्ष न्याय और समान अधिकारों की दिशा में एक पहल
Nyay Prayaas Foundation का चौथा नेशनल कॉन्क्लेव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में निष्पक्षता, समानता और कानूनी जागरूकता से जुड़े विचारों को आगे बढ़ाने का एक मंच है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि न्याय और अधिकारों से जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण विषय पर खुलकर चर्चा हो। पुरुषों की कानूनी एवं सामाजिक समस्याएं हों, Gender Neutral Laws की मांग हो या Parental Alienation जैसे पारिवारिक मुद्दे, इन सभी विषयों पर संवेदनशीलता और निष्पक्ष दृष्टिकोण के साथ संवाद आवश्यक है।
क्योंकि न्याय का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होता है, जब कानून के समक्ष हर व्यक्ति समान हो और प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष न्याय पाने का अवसर मिले।