साल 2027 तक मीन राशि में विराजमान रहेंगे शनि, इन राशियों पर शुरू होगी साढ़ेसाती

ज्योतिष | शनि ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में आयु, दुख, रोग, पीड़ा, विज्ञान, तकनीकी, कर्मचारी, सेवक, आदि का कारक ग्रह माना जाता है. मकर और कुंभ राशि पर शनि देव का आधिपत्य है. वहीं, तुला राशि शनि की उच्च राशि है. शनि देव (Shani Dev) को न्याय फलदाता और कर्म फल दाता के नाम से भी जाना जाता है. जब भी कोई बड़ा ग्रह राशि परिवर्तन करता है, तो इसका प्रभाव लगभग सभी 12 राशि के जातकों पर दिखाई देता है.

2027 तक मीन राशि में विराजमान रहेंगे शनि

शनि देव अभी मीन राशि में ही विराजमान है और साल 2027 तक वह इसी राशि में संचरण करने वाले हैं. ऐसे में कई राशि के जातकों पर शनि की साढेसाती और ढेया का प्रभाव भी देखने वाला है. ऐसे कुछ राशि के जातकों की परेशानियां बढ़ सकती है. साथ ही, धन हानि और स्वास्थ्य भी खराब हो सकता है. आज हम आपको उन्ही राशियों के बारे में जानकारी देने वाले हैं.

इन राशियों की बढ़ेगी परेशानियां

इस समय मेष राशि के जातकों पर साढेसाती का कष्टमय प्रभाव देखने को मिल सकता है. वहीं, मीन राशि पर दूसरे चरण की और कुंभ राशि पर तीसरे व अंतिम चरण की साढेसाती का प्रभाव दिखाई देगा. ऐसे में इन राशि के जातकों की परेशानियां बढ़ सकती है. ऐसे में आपको मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ सकता है, आय में भी कमी आएगी.

इस समय आपको नौकरी बदलने को लेकर कोई भी विचार नहीं करना है. धनु और सिंह राशि के जातकों पर शनि की ढैया का कष्टमय प्रभाव जारी रहने वाला है. ऐसे में इन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है.

जरूरी उपाय

अगर आप भी शनि की ढैया और साढेसाती से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो आपको शनिवार के दिन शनि प्रतिमा के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए. साथ ही, शनि की चालीसा का पाठ भी करना चाहिए. पीपल में नियमित रूप से हर शनिवार दूध और जल मिलाकर चढ़ाए. ऐसा करने से भी शनि के दुष्प्रभाव कम हो जाते हैं. अगर आप शनि की साडेसाती से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो आप हनुमान जी की भी पूजा अर्चना कर सकते हैं इससे भी आपको राहत मिलने वाले हैं.

डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Dailynews7 इनकी पुष्टि नहीं करता है.

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