Bilaspur High Court: बिलासपुर HC ने ट्रायल कोर्ट को आदेश किया निरस्त, आरोपी को 10 साल की सजा से किया दोषमुक्त, जानें पूरा मामला

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Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में ट्रायल कोर्ट (Trial Court) द्वारा दी गई 10 साल की कैद की सजा को खारिज करते हुए एक आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है।

यह मामला सरगुजा (Surguja) जिले के राजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम कोदू का है, जहां जमीन विवाद को लेकर हुए झगड़े में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

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क्या था पूरा मामला

गांव कोदू निवासी सेंदला का अपने गांव के ही धन्नू से जमीन के बंटवारे को लेकर 22 मार्च 2006 को विवाद हो गया था। गांव के कुछ लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन गुस्से में आकर सेंदला ने लकड़ी के डंडे से धन्नू के सिर पर वार कर दिया।

सिर में गंभीर चोट लगने के कारण धन्नू बेहोश हो गया। परिजनों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन कुछ दिन बाद उसे घर ले गए। आखिरकार 31 मार्च 2006 को उसकी मौत हो गई।

ट्रायल कोर्ट ने दी थी 10 साल की सजा

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया। ट्रायल कोर्ट ने 18 सितंबर 2007 को आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-2) के तहत गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 10 साल कैद की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट में अपील और आरोपी के तर्क

सेंदला ने इस फैसले को बिलासपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी। आरोपी ने अपील में कहा कि घटना अचानक झगड़े में हुई थी और उसका इरादा धन्नू को मारने का नहीं था।

उसने यह भी बताया कि झगड़ा तब हुआ जब धन्नू शराब के नशे में उसके घर आकर उसकी मां को मारने लगा। सेंदला ने रोकने की कोशिश की और इस दौरान सिर में चोट लग गई।

गवाहों के बयान पलटे, मेडिकल रिपोर्ट ने बदला फैसला

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया कि कई अहम गवाहों ने ट्रायल कोर्ट में दिए गए अपने बयान से पलटते हुए आरोपी के पक्ष में गवाही दी।

पीएम करने वाले डॉक्टर ने भी कहा कि उसने घायल को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया था लेकिन मृतक के परिवार ने उसे जल्दी छुट्टी दिला दी, जिससे सही इलाज नहीं हो सका।

हाईकोर्ट ने माना- गैर इरादतन घटना

जस्टिस संजय अग्रवाल (Justice Sanjay Agrawal) की कोर्ट ने माना कि घटना अचानक झगड़े का नतीजा थी और आरोपी का इरादा हत्या करने का नहीं था। साथ ही गवाहों और मेडिकल रिपोर्ट में विरोधाभास के चलते आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया।

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