MP Nursing College Scam Latest Update: सभी पैरामेडिकल कॉलेज की मान्यता-एडमिशन पर रोक बरकरार, HC ने मांगे निरीक्षण करने वाले अफसरों के नाम

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हाइलाइट्स

  • पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता-प्रवेश पर रोक बरकरार
  • हाईकोर्ट ने नर्सिंग मामले की सीबीआई जांच की फाइलें मांगी
  • काउंसिल को कॉलेजों का निरीक्षण करने वाले अफसरों के नाम भी देने होंगे

MP Nursing College Scam Latest Update: मप्र हाईकोर्ट में गुरुवार को बहुचर्चित नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज फर्जीवाड़ा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता और प्रवेश पर रोक बरकरार रखी है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने मान्यता आवेदन और कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा, नर्सिंग मामलों की सीबीआई जांच की सभी फाइलें भी प्रस्तुत करें। इतना ही नहीं कोर्ट ने कॉलेजों का निरीक्षण करने वाले अधिकारियों के नाम भी पेश करने के निर्देश दिए।

अलग-अलग याचिका पर हुई सुनवाई

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता और एडमिशन में गड़बड़ियों के मामले में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने अलग-अलग जनहित याचिका दायर की हैं। मामले में आज सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रदेश के सभी पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया है।

पैरामेडिकल काउंसिल पर गंभीर आरोप

याचिका में आरोप है कि एमपी पैरामेडिकल काउंसिल (MP Paramedical Council) के द्वारा पिछले शैक्षणिक सत्र (2023-24 एवं 2024-25) की मान्यता भूतलक्षी (बैकडेट) प्रभाव से बांटे हैं। मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (Madhya Pradesh Medical University0 से संबद्धता प्राप्त किए बिना सरकारी तथा निजी पैरामेडिकल कॉलेजों के द्वारा अवैध रूप से छात्रों को प्रवेश दिया गया है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि एक ही बिल्डिंग में नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं।

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मान्यता और प्रवेश पर रोक हटाने से HC का इनकार

आज की सुनवाई में पैरामेडिकल काउंसिल (MP Paramedical Council) की ओर से याचिका में जवाब पेश करते हुए कहा गया कि संपूर्ण मान्यता प्रक्रिया नियमानुसार और शासन की अनुमति से की गई है, इसलिए मान्यता प्रक्रिया और दाखिलों में लगी रोक हटाई जाए, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक हटाने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को काउंसिल के जवाब का परीक्षण कर कोर्ट में जवाब पेश करने दो हफ्ते की मोहलत दी है।

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