शाम पांच बजे रांची पहुंचेगा शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर, मंगलवार को उनके पैतृक गांव नेमरा में होगा अंतिम संस्कार

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Ranchi: लंबे समय से बीमार चल रहे शिबू सोरेन का निधन दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में इलाज के दौरान हो गया. इसे लेकर राज्य भर में शोक की लहर है. उनके निधन पर झारखंड सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है. इस दौरान कोई भी सरकारी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा. शोक की अवधि तक राष्ट्रीय झंडा आधा झंडा झुका रहेगा. झारखंड विधानसभा का मॉनसून सत्र अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है.

बताया जा रहा है कि उनके पार्थिव शरीर को एयर लिफ्ट कर  रांची लाया जाएगा. वो अपने बेटे सीएम हेमंत सोरेन के साथ रांची हवाईअड्डा पहुंचेंगे. उनके पार्थिव शरीर को एयरपोर्ट से मोरहाबादी स्थित शिबू सोरेन के आवास ले जाया जाएगा. मंगलवार यानी कल सुबह उनके अंतिम दर्शन के लिए पार्टी कार्यालय और विधानसभा परिसर ले जाया जाएगा. जहां से करीब दो बजे सभी उनके पैतृक गांव रामगढ़ स्थित गोला के नेमरा गांव ले जाया जाएगा. नेमरा में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

गुरुजी ने 38 वर्षों से अधिक समय तक झारखंड मुक्ति मोर्चा का नेतृत्व किया. झारखंड राज्य के लिए उन्होंने लंबे समय तक आंदोलन चलाया और तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे. पहली बार 2 मार्च 2005 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन बहुमत सिद्ध न कर पाने के कारण 12 मार्च 2005 को इस्तीफा देना पड़ा. पहली बार वह 10 दिन ही सीएम रह सके. दूसरी बार 27 अगस्त 2008 को वह मुख्यमंत्री बने और 19 जनवरी 2009 तक इस पद पर रहे. तीसरी बार 30 दिसंबर 2009 को मुख्यमंत्री पद संभाला और 1 जून 2010 तक रहे.

शिबू सोरेन 8 बार लोकसभा सांसद चुनकर संसद पहुंचे. तीन बार राज्यसभा सांसद भी रहे. केंद्रीय के रूप में भी देश को अपनी सेवाएं दीं. झारखंड की राजनीति के वह सबसे बड़ी शख्सियत रहे औन देश की सिसायत में भी बोलबाला रहा. झारखंड में उन्हें दिशोम गुरु (देश का गुरु) कहकर पुकारा ज रहा.

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