MP Private School Protest: भोपाल में DPI की जलाई अर्थी, न्यायिक जांच और 250 निजी स्कूलों की मान्यता बहाल करने की मांग

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Madhya Pradesh Bhopal Private School Association Protest Update: भोपाल में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने मंगलवार, 5 अगस्त 2025 को लोक शिक्षण संचालनालय की अर्थी जलाई। एसोसिएशन ने जिम्मेदार अधिकारियों की न्यायिक जांच के साथ प्रदेशभर के 250 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता बहाल करने की मांग की। डीपीआई के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

जानें क्या हैं निजी स्कूल प्रबंधन की मांग

एक ही समिति के दो स्कूल: कुछ मामलों में, एक ही समिति द्वारा संचालित दो स्कूलों को समान भूमि आवंटित होने के बावजूद, विभाग ने एक की मान्यता जारी रखी और दूसरे की रद्द कर दी।
लंबे समय से मान्यता प्राप्त स्कूल: जिन स्कूलों को 40-50 साल से लगातार मान्यता मिल रही थी, उनकी मान्यता भी अब समाप्त कर दी गई है।
सुनवाई में उपस्थिति के बावजूद कार्रवाई: सागर के एक स्कूल संचालक सुनवाई में दो बार उपस्थित हुए और अपने हस्ताक्षर भी किए, फिर भी उनकी मान्यता यह कहकर रद्द कर दी गई कि वे उपस्थित नहीं हुए थे।
संकाय के बिना प्रयोगशाला की कमी: कई स्कूलों की मान्यता इस आधार पर रद्द कर दी गई कि उनमें प्रयोगशाला नहीं थी, जबकि उन स्कूलों में विज्ञान संकाय ही नहीं था।
दस्तावेजों और तस्वीरों पर सवाल: कुछ संचालकों ने लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब और प्रयोगशाला की तस्वीरें जमा कीं, लेकिन उनकी मान्यता यह कहकर रद्द कर दी गई कि तस्वीरें मापदंड के अनुसार नहीं थीं।
स्टाफ की कमी: अनेक स्कूलों की मान्यता स्टाफ की कमी के आधार पर रद्द की गई है।
बिल्ट-अप एरिया की समस्या: कई स्कूलों को 600 वर्ग फुट से कम बिल्ट-अप एरिया होने का हवाला देकर मान्यता रद्द कर दी गई, जबकि संचालकों ने 660 वर्ग फुट के क्षेत्र का किरायानामा पेश किया था।
जमीन के नियमों में बदलाव: एक स्कूल जिसके पास एक एकड़ जमीन है और उसे 1997 से मान्यता मिली हुई है (जब नियम कहीं भी जमीन होने का था), उसकी मान्यता अब रद्द कर दी गई है।
किराएनामे और लीज से संबंधित मुद्दे: कई स्कूलों के किराएनामे की अवधि समाप्त होने से पहले ही उनकी मान्यता रद्द कर दी गई। भोपाल के एक स्कूल, जिसके पास निर्धारित मापदंड से अधिक जमीन है और लीज 2027 तक वैध है, उसकी मान्यता भी रद्द कर दी गई।
गलत तरीके से छात्रों का स्थानांतरण: जिन स्कूलों की मान्यता रद्द की गई है, उनके ऑनलाइन आवेदन शुल्क (लगभग 1.12 करोड़ रुपये) लेने के बाद भी, छात्रों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित किया जा रहा है, जहाँ अंग्रेजी माध्यम की सुविधा नहीं है।

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MP Kubereshwar Dham Hadsa

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