बीएचयू में देश के बेहतरीन शिक्षकों और छात्रों के लिए तैयार करेंगे माहौल, संवाद से बढ़ाएंगे आपसी विश्वास, कुलपति ने बताया विजन

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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपना विजन स्पष्ट किया। कहा कि देश के बेहतरीन शिक्षकों और छात्रों को जोड़ने के लिए विश्वविद्यालय में बेहतर माहौल तैयार किया जाएगा। संवाद के जरिये आपसी विश्वास को मजबूत किया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि महामना ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में इस तरह का माहौल तैयार किया कि देश के बेहतरीन शिक्षकों ने यहां अपनी सेवाएं दीं। वहीं छात्रों ने शिक्षा ग्रहण की। उसी तरह का माहौल फिर तैयार करने की कोशिश की जाएगी ताकि वर्तमान में देश के बेहतरीन शिक्षकों, प्रोफेनल्स और छात्रों को यहां लाया जा सके। उन्होंने कहा कि आपसी संवाद के जरिए विश्वास को बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। 

प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी को 31 जुलाई को काशी हिंदू विश्ववि‌द्यालय का 29वां कुलपति नियुक्त किया गया। उनका कार्यकाल तीन वर्षों के लिए या 70 वर्ष की आयु पूर्ण करने तक रहेगा। प्रोफेसर चतुर्वेदी का बीएचयू से पुराना नाता है। उन्होंने वर्ष 1994 में काशी हिंदू विश्ववि‌द्यालय के प्रौ‌द्योगिकी संस्थान (अब आईआईटी-बीएचयू) के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग में व्याख्याता के रूप में कार्य करना आरंभ किया। इसके बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की के इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग में सेवाएं दीं, जिसके बाद वे वर्ष 1999 में आईआईटी कानपुर चले गए। वहाँ, उन्होंने कई महत्वपूर्ण नेतृत्व भूमिकाओं में कार्य किया, जिनमें विद्युत अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष, डीन, अनुसंधान एवं विकास, तथा संस्थान के उप-निदेशक की ज़िम्मेदारी शामिल हैं।

प्रोफेसर चतुर्वेदी ने जनवरी 2017 में आईआईटी रुड़की के निदेशक के रूप में कार्यभार संभाला और अक्टूबर 2022 तक इस पद पर कार्यरत रहे। इस अवधि के दौरान उन्होंने भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (IIAS), शिमला, के निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) के रूप में जनवरी 2017 से अगस्त 2018 तक और आईआईटी मंडी के निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) के रूप में जुलाई 2020 से जनवरी 2022 तक सेवाएं दीं। प्रोफेसर चतुर्वेदी ने आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक. (1986), एम.टेक. (1988) और पीएच.डी. (1995) की उपाधियाँ अर्जित की हैं। वे बीएसएनएल-आईआईटी कानपुर टेलीकॉम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के समन्वयक रहे हैं। इस केन्द्र ने भारतीय दूरसंचार के क्षेत्र में अनेक परियोजनाएं संचालित की हैं।

शिक्षण और शोध में विशिष्ट योगदान के लिए प्रोफेसर चतुर्वेदी को कई सम्मानों से सम्मानित किया गया है, जिनमें इनसा टीचर्स अवार्ड, आईआईटी कानपुर का विशिष्ट शिक्षक सम्मान, और नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, सिंगापुर से टैन चिन तुआन फैलोशिप शामिल हैं। वर्ष 2024 में आईआईटी कानपुर ने उन्हें संस्थान फैलोशिप से सम्मानित किया। वे टेलीकॉम स्टैंडर्ड्स डेवलपमेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया (TSDSI) के संस्थापक सदस्य हैं। प्रोफेसर चतुर्वेदी दूरसंचार विभाग की उस समिति के सदस्य भी रहे, जिसने 2008 में टेलीकॉम ऑपरेटर्स को स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए निर्धारित मानदंडों की सिफारिश की थी। प्रो. चतुर्वेदी का शोध क्षेत्र संचार सिद्धांत और वायरलेस कम्युनिकेशन है। उन्होंने फिजिकल लेयर से संबंधित कई समस्याओं पर कार्य किया है, जैसे वेवफॉर्म शेपिंग, सीक्वेंस डिज़ाइन, MIMO सिस्टम आदि।








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