Archana Tiwari Patwari Shadi: सिविल जज बनने वाली अर्चना तिवारी की पटवारी से शादी करा रहे थे घरवाले, परेशान होकर भागी थी


हाइलाइट्स

  • अर्चना तिवारी मिसिंग केस का खुलासा
  • पटवारी से शादी नहीं करना चाहती थी अर्चना
  • अर्चना तिवारी का कबूलनामा

Archana Tiwari Patwari Shadi: मैं सिविल जज बनूंगी, पटवारी से क्यों शादी करूंगी ! यही कारण रहा और अर्चना तिवारी चलती ट्रेन से भाग गई। रेलवे पुलिस के सामने अर्चना तिवारी ने कबूलनामे में कहा कि घरवाले मेरी मर्जी के खिलाफ शादी के लिए रिश्ता देख रहे थे। कुछ दिन पहले मुझे बताया गया कि तुम्हारे के लिए एक पटवारी लड़का देख लिया है। परिजन बार-बार शादी करने के लिए मजबूर कर रहे थे। इसी वजह से मैं मानसिक रूप से परेशान हो गई थी।

‘सिविल जज बन जाने तक मैं शादी नहीं करूंगी’

अर्चना तिवारी ने बताया कि 7 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने के लिए मैं इंदौर से कटनी के लिए नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन से रवाना हुई, लेकिन मैं मानसिक रूप से घर जाने के लिए तैयार नहीं थी। मैंने सोच लिया था कि मैं अब घर नहीं जाऊंगी और सिविल जज बन जाने तक मैं शादी नहीं करूंगी।

Archana Tiwari Patwari Shadi missing case
अर्चना तिवारी

इटारसी में अर्चना ने ली तेजेंद्र और सारांश की मदद

अर्चना तिवारी ने इटारसी जंक्शन पहुंचने से पहले अपने पुराने क्लाइंट तेजेंद्र सिंह से कॉन्टैक्ट किया। उसने तेजेंद्र सिंह को बताया कि वो इटारसी में उतरकर वापस इंदौर जाना चाहती है। अर्चना ने अपने दोस्त सारांश को भी इटारसी बुला लिया। ऐसी जगह उतरने की प्लानिंग की जहां पर CCTV कैमरे न हों। इटारसी जंक्शन के आउटर पर अर्चना तिवारी उतर गई।

Summary Archana TiwariSummary Archana Tiwari
सारांश

2-3 दिन हैदराबाद में रुकी अर्चना तिवारी

नर्मदापुरम रेलवे स्टेशन से तेजेंद्र अर्चना के साथ ट्रेन में बैठा। इटारसी में उसे सारांश के पास छोड़कर रुक गया। अर्चना तिवारी सारांश की कार से शुजालपुर पहुंची और इसके बाद इंदौर गई। अर्चना को आशंका थी कि उसके घरवाले इंदौर आ सकते हैं, इसलिए वो हैदराबाद चली गई। अर्चना हैदराबाद में 2-3 दिन रुकी।

नेपाल पहुंच गई अर्चना

अर्चना तिवारी को पता चला कि उसका केस चर्चा में आ गया है। वो खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही थी। 11 अगस्त को अर्चना तिवारी सारांश के साथ हैदराबाद से दिल्ली गई। फिर वहां से टैक्सी से नेपाल के धनगढ़ी पहुंच गई। वहां से वो काठमांडू पहुंची, जहां सारांश ने अपने परिचित वायपी देवकोटा से बात करके उसे एक होटल में ठहराया और खुद इंदौर वापस आ गया। कुछ दिन बाद देवकोटा ने अर्चना को नेपाल की एक सिम दी, जिसके जरिए वो व्हाट्सएप पर सारांश से बात करती थी। अर्चना काठमांडू से फ्लाइट के जरिए धनगढ़ी पहुंची और वहां से लखीमपुर खीरी, नेपाल बॉर्डर आ गई, जहां से रेलवे पुलिस ने उसे ढूंढा।

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अर्चना के दोस्तों ने नहीं की कोई गलत हरकत

अर्चना तिवारी ने पुलिस को बताया कि सारांश और तेजेंद्र ने दोस्त के नाते उसकी मदद की। किसी ने उसके साथ गलत हरकत नहीं की। पुलिस ने सारांश के जरिए अर्चना तिवारी से कॉन्टैक्ट किया था और उसे बताया था कि उसके परिवार वाले बहुत परेशान हैं।

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