वाराणसी। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए पुलिस विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। इसी क्रम में 20 अगस्त 2025 को पुलिस उपायुक्त गोमती ज़ोन ने संदीपनी पब्लिक स्कूल, जंसा में विद्यार्थियों से संवाद किया और उन्हें साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी दी।
इस दौरान छात्रों को साइबर अपराधों के विभिन्न प्रकार और अपराधियों के तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया। उपायुक्त ने फिशिंग, ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन गेमिंग ठगी और रैनसमवेयर अटैक जैसे मामलों के वास्तविक उदाहरण साझा किए। विद्यार्थियों को समझाया गया कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सुरक्षा की पहली शर्त है।

छात्रों को “स्मार्ट यूजर, सेफ यूजर” बनने का मंत्र देते हुए पुलिस अधिकारी ने मजबूत पासवर्ड बनाने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाने, संदिग्ध लिंक से बचने, सोशल मीडिया पर प्राइवेसी सेटिंग्स सही रखने और व्यक्तिगत जानकारी को गोपनीय बनाए रखने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने पब्लिक वाई-फाई का सतर्क उपयोग, फेक जॉब ऑफर और लॉटरी स्कैम से सावधानी बरतने तथा ओटीपी व बैंक डिटेल किसी से साझा न करने की हिदायत दी।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों को यह भी सिखाया गया कि अगर साइबर अपराध का सामना हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। इसके अलावा सबूत सुरक्षित रखने, नजदीकी थाना या साइबर सेल से संपर्क करने और संदिग्ध एप्लिकेशन या अज्ञात QR कोड से दूरी बनाए रखने के सुझाव दिए गए।
संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी शंकाएँ रखीं जिनका समाधान मौके पर किया गया। शिक्षकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल साक्षरता ही आने वाले समय में समाज की सबसे बड़ी ढाल साबित होगी।
पुलिस उपायुक्त गोमती ज़ोन ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि वे न केवल खुद सतर्क रहें, बल्कि अपने परिवार और समाज में भी साइबर सुरक्षा का संदेश फैलाएँ। उन्होंने कहा कि जागरूक नागरिक ही डिजिटल युग में सुरक्षित रह सकते हैं।
पुलिस विभाग ने उम्मीद जताई कि इस तरह के अभियान से साइबर अपराधों की घटनाओं में कमी आएगी और एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार होगा।