नोएडा केबलिंग घोटाले में फिर तेज हुई कार्रवाई, तीन अफसरों पर विभागीय चार्जशीट की तैयारी

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नोएडा प्राधिकरण में चर्चित अंडरग्राउंड केबलिंग घोटाले को लेकर एक बार फिर कार्रवाई तेज हो गई है। पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ Yadav Singh से जुड़े प्रकरण में अब प्राधिकरण के तीन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय चार्जशीट देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जिन अधिकारियों पर कार्रवाई प्रस्तावित है, उनमें वर्तमान महाप्रबंधक (जल-सीवर एवं ईएंडएम) आरपी सिंह और दो अन्य अधिकारी निजामुद्दीन व प्रमोद शामिल हैं। दोनों का नोएडा से तबादला हो चुका है।

जांच कमेटी गठित, चार्जशीट प्रक्रिया शुरू

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ के निर्देश पर कार्मिक विभाग के ओएसडी अशोक कुमार शर्मा की अध्यक्षता में दो वरिष्ठ प्रबंधकों की जांच कमेटी गठित की गई है। प्राधिकरण स्तर पर विभागीय चार्जशीट की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी Central Bureau of Investigation (सीबीआई) की चार्जशीट में नाम शामिल होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की फाइल लंबे समय तक शासन को नहीं भेजी गई थी। शासन ने कई बार इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन प्राधिकरण की ओर से ठोस जवाब नहीं दिया गया।अब शासन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जवाब तलब किया है। उल्लेखनीय है कि विभागीय जांच लंबित रहने के दौरान संबंधित अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ भी मिल चुका है।

2020 में 20 अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई

गौरतलब है कि वर्ष 2020 में अंडरग्राउंड केबलिंग प्रकरण में कथित रूप से पसंदीदा कंपनियों को टेंडर देकर लाभ पहुंचाने के आरोप में यादव सिंह समेत 20 अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी की गई थी। हालांकि उस समय इन तीन अधिकारियों को कार्रवाई से बाहर रखा गया था। अब नए सिरे से फाइल खुलने के बाद इन अधिकारियों को भी जांच के दायरे में लिया जा रहा है।

शिकायतकर्ता और गवाह भी बने आरोपी

इस मामले में सेक्टर-39 थाने में आरपी सिंह ने ही तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था। वे सीबीआई जांच में गवाह भी रहे और करीब 250 से अधिक बार पूछताछ के लिए सीबीआई कार्यालय में बुलाए गए।

ताजा जानकारी के अनुसार, सीबीआई ने उन्हें भी अपनी चार्जशीट में शामिल कर लिया है। इस पर महाप्रबंधक (ईएंडएम) आरपी सिंह का कहना है कि यह जांच की सतत प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस समय यह प्रकरण हुआ, वे डिविजन-2 में तैनात थे और अंडरग्राउंड केबलिंग में लागू रेट कोड पूरे प्राधिकरण में समान रूप से लागू था। इसी आधार पर सीबीआई ने उनका नाम भी शामिल किया है।

एसीईओ ने की पुष्टि

प्राधिकरण की एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने पुष्टि की है कि तीनों अधिकारियों को विभागीय चार्जशीट दी जा रही है। उन्होंने बताया कि ओएसडी की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजेगी।

नोएडा प्राधिकरण में इस प्रकरण को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और शासन स्तर पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

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