चलती ट्रेन से उतरने की कोशिश… सैकेंड में खत्म हो गई Darbhanga के पूर्व फौजी और जनसुराज नेता आशिक रजा की ज़िंदगी, पढ़िए
जाले, दरभंगा। जोगियारा रेलवे स्टेशन पर गुरुवार को एक दर्दनाक रेल हादसे में जनसुराज पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष और भारतीय सेना के पूर्व सूबेदार आशिक रजा की मौत हो गई। वह रेवढ़ा गांव निवासी मो. रेजा के पुत्र थे और फिलहाल जनसुराज पार्टी की ओर से सक्रिय राजनीतिक भूमिका में थे।
ट्रेन से कटने से हुई मौके पर मौत
घटना के संबंध में बताया गया है कि आशिक रजा दरभंगा से अमृत भारत ट्रेन से अपने गांव रेवढ़ा लौट रहे थे। जब ट्रेन जोगियारा स्टेशन पर पहुँची, उस समय एक मालगाड़ी पहले से एक नंबर प्लेटफार्म पर खड़ी थी। स्टेशन मास्टर ने उसी प्लेटफार्म पर अमृत भारत ट्रेन को रास्ता दे दिया।
गाड़ी की रफ्तार धीमी होने के कारण, कयास लगाए जा रहे हैं कि आशिक रजा ने चलती ट्रेन से उतरने की कोशिश की, लेकिन संतुलन बिगड़ने के कारण वे ट्रेन की चपेट में आ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
पूर्व फौजी और युवाओं के प्रेरणास्त्रोत थे आशिक रजा
रेवढ़ा पंचायत के मुखिया डॉ. शफीउल्लाह चमन ने जानकारी दी कि आशिक रजा दो साल पहले भारतीय सेना से सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने सेना में अपने सेवा कार्य के दौरान कई उपलब्धियाँ अर्जित की थीं। वे भारतीय सेना में अनुशासन और वीरता के प्रतीक रहे।
सेवानिवृत्ति के बाद भी वे लगातार गांव के युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रोत्साहित करते थे। उनके प्रयासों से कई युवाओं ने भारतीय सेना में जाने की तैयारी शुरू की थी।
जनसुराज पार्टी में निभा रहे थे अहम भूमिका
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और जनसुराज पार्टी से जुड़ गए। वर्तमान में वे प्रखंड अध्यक्ष के रूप में संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता और साख काफी मजबूत थी।
जनसुराज पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस हादसे को अपूरणीय क्षति बताया है। पार्टी पदाधिकारियों ने उन्हें समाजसेवी, देशभक्त और प्रेरणादायक व्यक्तित्व बताया।
गांव और क्षेत्र में शोक की लहर
इस हादसे की खबर मिलते ही रेवढ़ा गांव और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। क्षेत्रीय लोगों ने आशिक रजा की मृत्यु को एक बड़ा सामाजिक नुकसान बताया है। उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
गांव के युवाओं ने बताया –
आशिक रजा हमेशा अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति की मिसाल थे। वे सभी को समय पर जागने, फिटनेस बनाए रखने और लक्ष्य पर केंद्रित रहने की सीख देते थे।
रेलवे प्रशासन पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मालगाड़ी के एक नंबर प्लेटफॉर्म पर खड़े रहने के बावजूद उसी ट्रैक पर अमृत भारत ट्रेन को रास्ता देना रेलवे प्रशासन की चूक है। यदि प्लेटफार्म क्लियर नहीं था तो यात्रियों को उतरने में कठिनाई हो सकती थी।
हालांकि रेलवे की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन स्थानीय प्रशासन और रेलवे अधिकारी घटना की जांच कर रहे हैं।
सेना से सेवा निवृत्त, युवाओं के प्रेरणास्रोत
एक अनुशासित सैनिक, प्रेरणादायक नेता और समाजसेवी की इस असमय मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को शोक में डाल दिया है। यह घटना न केवल रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व के जाने से समाज को भी भारी क्षति पहुंची है।