हरियाणा सरकार की बड़ी पहल, अब दूसरा लड़का होने पर भी मिलेंगे 5 हजार रुपये, ये करना होगा काम

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हरियाणा सरकार गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और आर्थिक सहयोग प्रदान करने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। इसी कड़ी में हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री मातृत्व सहायता योजना के तहत महिलाओं को बड़ी राहत दी है। अब यदि किसी महिला का दूसरा बच्चा लड़का होता है और उसका प्रसव सरकारी अस्पताल में होता है, तो उसे सरकार की ओर से 5 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना और गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है। योजना का लाभ केवल हरियाणा राज्य की स्थायी निवासी महिलाओं को ही मिलेगा। पात्र महिलाओं के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत किसी सरकारी अस्पताल में प्रसव कराएं। जननी सुरक्षा योजना के तहत पहले से ही औसतन एक हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जबकि मुख्यमंत्री मातृत्व सहायता योजना के अंतर्गत अतिरिक्त राशि प्रदान की जाएगी।

योजना का लाभ उठाने के लिए परिवार पहचान पत्र में माता-पिता और दोनों बच्चों का नाम दर्ज होना जरूरी है। इसके साथ ही पात्र महिलाओं को सरल हरियाणा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के दौरान महिला को निर्धारित पात्रता से संबंधित कोई एक वैध दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य होगा, जिसमें दिव्यांगता प्रमाण पत्र, ई-श्रम कार्ड, मनरेगा कार्ड, बीपीएल या पीला राशन कार्ड, किसान सम्मान निधि कार्ड, एससी-एसटी प्रमाण पत्र या परिवार पहचान पत्र में आठ लाख रुपये से कम वार्षिक आय का प्रमाण शामिल है।

महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दर्शना सिंह ने बताया कि केंद्र या राज्य सरकार तथा सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यरत महिला कर्मचारी इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगी। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए गर्भावस्था का पंजीकरण जरूरी है और कम से कम एक बार प्रसव पूर्व जांच कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही बच्चे का पंजीकरण और उसे बीसीजी, ओपीवी, डीपीटी तथा हेपेटाइटिस-बी के टीके लगवाना भी आवश्यक शर्तों में शामिल है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मातृत्व सहायता योजना के लिए आंगनवाड़ी वर्कर या आशा वर्कर के माध्यम से भी आवेदन कराया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इस योजना से सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को सीधा लाभ पहुंच सकेगा।

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