CGMSC News: CGMSC में फाइलें लंबित होने से 150 करोड़ के मेडिकल उपकरणों की खरीदी रुकी, मेडिकल कॉलेजों में मरीज सेवाएं प्रभावित

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CGMSC News: छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लंबे समय से जरूरी चिकित्सा उपकरणों की खरीदी पूरी तरह ठप पड़ी है। करीब 150 करोड़ रुपये मूल्य के हाई-एंड मेडिकल उपकरणों की मांग कई साल पहले मेडिकल कॉलेजों से भेजी जा चुकी है, लेकिन ये प्रस्ताव अब भी CGMSC (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन) की फाइलों में अटक गए हैं। बजट स्वीकृत होने के बावजूद उपकरणों के लिए टेंडर प्रक्रिया आगे न बढ़ पाने से अस्पतालों में मरीज सेवाएं सीधे प्रभावित हो रही हैं।

CT–MRI से लेकर ICU मॉनिटर तक की कमी

राज्य के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों (medical college) में कई तरह के उपकरणों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। कुछ कॉलेजों में तो यह देरी दो साल से भी ज्यादा बताई जा रही है। CT स्कैन, MRI, डिजिटल एक्सरे सिस्टम, ICU मॉनिटर, वेंटिलेशन उपकरण, डेंटल सेटअप और रेडियोलॉजी सिस्टम जैसे कई अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं हो पा रहे। इन देरी का असर न केवल मरीजों की जांच और उपचार पर पड़ रहा है, बल्कि मेडिकल छात्रों की प्रैक्टिकल और क्लिनिकल शिक्षा भी बाधित हो रही है।

फाइल फोटो प्रतीकात्मक

अलग-अलग प्रस्तावों और अलग प्रारूपों ने प्रक्रिया को धीमा किया

सूत्रों के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों से उपकरणों की मांग अलग-अलग समय पर और अलग-अलग प्रारूपों में भेजी गई थी। इसकी वजह से CGMSC को हर मांग को स्वतंत्र प्रक्रिया के तहत निपटाना पड़ रहा है। एक ही प्रकार के कई उपकरणों के लिए अलग-अलग निविदाएँ निकालना, सुरक्षा जांच, क्वालिटी चेक और तकनीकी परीक्षण जैसी प्रक्रियाओं को बार-बार दोहराया जा रहा है। इससे हर फाइल पर दुबारा समय लग रहा है और कुल मिलाकर संपूर्ण सप्लाई प्रक्रिया रुक गई है।

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मरीजों को भारी असुविधा, उपचार में देरी बढ़ी

मेडिकल कॉलेजों में उपकरणों की कमी से रोजाना बड़ी संख्या में मरीज प्रभावित हो रहे हैं। कई मामलों में जांचें बाहरी केंद्रों पर करानी पड़ रही हैं, जिससे खर्च बढ़ रहा है और रिपोर्ट मिलने में भी देरी हो रही है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को इसका सबसे अधिक असर झेलना पड़ रहा है।

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अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई की मांग

लगातार देरी के कारण कई डॉक्टर, स्टाफ और कॉलेज प्रशासन अब CGMSC से तुरंत कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बजट स्वीकृत होने के बावजूद उपकरणों का न पहुंचना स्वास्थ्य व्यवस्था (Chhattisgarh health news) को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है, इसलिए टेंडर और सप्लाई प्रक्रिया को प्राथमिकता पर पूरा किया जाना चाहिए। 

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