Chhattisgarh Liquor Scam: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को कोर्ट ने जेल भेजा, 8 अक्टूबर को बेल पर सुनवाई
हाइलाइट्स
- पूर्व सीएम के बेटे चैतन्य बघेल जेल भेजे गए
- शराब घोटाले में ईडी ने की थी गिरफ्तारी
- 8 अक्टूबर को होगी बेल पर सुनवाई कोर्ट में
Chhattisgarh Liquor Scam Update: रायपुर में छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले (Liquor Scam) से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को एसीबी-ईओडब्ल्यू (ACB-EOW) की विशेष कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 13 अक्टूबर तक जेल भेज दिया गया। मामले ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और न्यायिक हलकों में हलचल तेज कर दी है।
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— Bansal News Digital (@BansalNews_) October 6, 2025

ईओडब्ल्यू कोर्ट में हुई पेशी
ईओडब्ल्यू की विशेष अदालत में चैतन्य बघेल को पेश किए जाने के बाद उन्हें 13 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उनके वकीलों ने बेल (Bail) के लिए याचिका दायर की है, जिस पर सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी। इससे पहले ईओडब्ल्यू ने चैतन्य को 13 दिन की रिमांड पर लेकर लंबी पूछताछ की थी।
जन्मदिन पर हुई थी गिरफ्तारी
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 18 जुलाई को चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन के दिन भिलाई स्थित निवास से गिरफ्तार किया था। उन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत हिरासत में लिया गया। शराब घोटाले की जांच एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसे ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धाराओं में आगे बढ़ाया।
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16.70 करोड़ रुपए कैश की लेन-देन की जांच
ईडी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से करीब 16.70 करोड़ रुपये नगद (Cash) मिले। उन्होंने इस रकम का उपयोग अपनी रियल एस्टेट कंपनियों और प्रोजेक्ट्स में किया। जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने ठेकेदारों को नकद भुगतान किया और नकदी के बदले बैंक प्रविष्टियां कराई। इसके अलावा त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ मिलीभगत कर अपने विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीद की आड़ में 5 करोड़ रुपए प्राप्त किए।


विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट में काले धन का इस्तेमाल
ईडी की जांच से यह तथ्य भी सामने आया कि चैतन्य बघेल के विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (Vithal Green Project) में शराब घोटाले से जुड़ी रकम निवेश की गई थी। प्रोजेक्ट के अकाउंटेंट्स के ठिकानों पर छापेमारी कर ईडी ने कई डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए। कंसल्टेंट राजेंद्र जैन के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट पर वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ रुपए था, जबकि दस्तावेजों में केवल 7.14 करोड़ रुपए दर्ज किए गए। साथ ही 4.2 करोड़ रुपए का कैश पेमेंट ठेकेदार को किया गया, जिसे आधिकारिक रिकॉर्ड में नहीं दिखाया गया।
क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले की जांच कर रही है और एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जिसमें 3,200 करोड़ रुपए से अधिक के भ्रष्टाचार की बात कही गई है। इस घोटाले में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों समेत कई लोगों के नाम दर्ज हैं। ईडी की जांच से खुलासा हुआ है कि तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के प्रबंध निदेशक ए.पी. त्रिपाठी तथा कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट ने मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया था, जिसके तहत शराब के ठेकों, वितरण और लाइसेंसिंग में भारी अनियमितताएं बरती गईं, सरकारी खजाने को चूना लगाया गया और निजी हितों को बढ़ावा दिया गया।
शराब घोटाला मामले में ईडी ने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, ITS अरुण पति त्रिपाठी और पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक कवासी लखमा को पहले ही गिरफ्तार किया है।

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