Chhattisgarh Teacher Reappointment: हटाए गए बीएड शिक्षकों को फिर मिली नौकरी, सहायक विज्ञान शिक्षक के रूप में होगी नियुक्ति
Chhattisgarh Teacher Reappointment: छत्तीसगढ़ में नौकरी से हटाए गए शिक्षकों के लिए राहतभरी खबर सामने आई है। जिन शिक्षकों को बीएड डिग्री मान्यता विवाद के चलते पूर्व में सेवा से हटाया गया था, उन्हें अब राज्य सरकार दोबारा शिक्षा विभाग में नियुक्त करने जा रही है। शासन ने इन शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है और उन्हें अब सहायक विज्ञान शिक्षक के पद पर नियुक्त किया जाएगा। यह कदम न केवल शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी अनुभवी स्टाफ की वापसी सुनिश्चित करेगा।
डाइट स्कूल रायपुर में शुरू हुई समायोजन प्रक्रिया

राजधानी रायपुर स्थित शंकर नगर के डाइट स्कूल में 17 जून से समायोजन के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। पहले दिन महिला और दिव्यांग अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। कुल 301 अभ्यर्थियों को बुलावा भेजा गया, जिसमें से 297 उपस्थित हुए। पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पारदर्शी माहौल में संचालित हुई, जहां अधिकारियों ने गाइडलाइन का पालन करते हुए हर स्तर पर स्पष्टता बनाए रखी।
18 जून को दूसरे चरण की काउंसलिंग
काउंसलिंग की यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से प्रतिदिन आयोजित की जा रही है। 18 जून को दूसरे दिन 300 अभ्यर्थियों को बुलाया गया है। राज्य सरकार की योजना के अनुसार यह प्रक्रिया 26 जून 2025 तक चलेगी, और प्रतिदिन अलग-अलग सूची के अनुसार योग्य अभ्यर्थियों को बुलाया जाएगा। यह प्रयास उन हजारों शिक्षकों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है जो वर्षों से न्याय की राह देख रहे थे।
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शासन ने मानी गलती
गौरतलब है कि ये सभी शिक्षक पूर्व में सीधी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्त हुए थे, लेकिन बाद में उनकी बीएड डिग्री को अमान्य मानते हुए सेवा से हटा दिया गया था। लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे इन शिक्षकों की पीड़ा को समझते हुए साय सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाया और उन्हें पुनः शिक्षा विभाग में समायोजित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय न केवल सरकारी संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की बहाली भी सुनिश्चित करता है।
साय सरकार की इस पहल से न केवल शिक्षकों को सम्मानजनक पुनर्नियुक्ति का अवसर मिला है, बल्कि हजारों परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई है। यह निर्णय भावनात्मक, सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से ऐतिहासिक है, जो शासन की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता को दर्शाता है।
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