रांची में नहीं थम रहा जमीन का खेल, कांके रिजार्ट के मालिक सहित दस पर सीआइडी ने दर्ज की प्राथमिकी

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Ranchi: कांके रिजार्ट के मालिक बीके सिंह जमीन माफिया कमलेश सहित दस पर सीआइडी ने शिकंजा कसा है. कांके के चामा निवासी घोड़े उरांव की शिकायत पर जांच के बाद 30 जुलाई को सीआइडी ने दर्ज की प्राथमिकी. जमीन की प्रकृति बदलकर गैर आदिवासियों को जमीन बेचने का आरोप ईडी पहले से कर रही है जांच. कई और जमीन माफिया घेरे में. राज्य ब्यूरो, जागरण. रांची. ईडी के बाद अब झारखंड पुलिस की सीआइडी ने भी कांके में जमीन घोटाला मामले की जांच तेज कर दी है. सीआइडी ने 30 जुलाई को प्राथमिकी दर्ज कर कांके रिजार्ट के मालिक ब्रजेश कुमार सिंह, जमीन माफिया कमलेश सिंह, राजेश लिंडा, उमेश टोप्पो, शंकर कुजूर सहित दस को नामजद आरोपित बनाया है. सीआइडी ने यह प्राथमिकी कांके थाना क्षेत्र के चामा निवासी घोड़े उरांव की शिकायत पर जांच के बाद यह प्राथमिकी दर्ज की है. पूरा मामला जमीन की प्रकृति बदलकर गैर आदिवासियों के साथ जमीन की खरीद-बिक्री से संबंधित है. कांके रिजार्ट के मालिक बीके सिंह पर एक साजिश के तहत कांके अंचल के पदाधिकारियों-कर्मियों की मिलीभगत से जमीन हड़पने का आरोप है. इस मामले में पूर्व में कांके थाने में भी प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिसमें रांची पुलिस ने तीन आरोपितों को जेल भेजा था. जमीन घोटाला केस में मनी लांड्रिंग के तहत जांच के क्रम में ईडी ने कांके में बड़े पैमाने पर जमीन की प्रकृति बदलकर, जाली दस्तावेजों के आधार पर खरीद-बिक्री मामले का खुलासा किया था. ईडी के खुलासे के बाद ही झारखंड पुलिस ने भी समानांतर जांच शुरू की थी और आइजी सुदर्शन मंडल के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया गया था. इसी एसआइटी के पास कांके के चामा निवासी घोड़े उरांव ने लिखित शिकायत की थी. उन्होंने शिकायत की थी कि आरोपित उमेश टोप्पो, शंकर कुजूर, राजेश लिंडा आदि ने कांके अंचल कार्यालय के कर्मचारियों से साठगांठ कर उनकी जमीन की प्रकृति को बदल दिया. दस्तावेजों में छेड़छाड़ की. जाली दस्तावेजों के आधार पर जमीन की खरीद-बिक्री कर दी. उनकी जमीन से संबंधित पंजी टू व आनलाइन दस्तावेजों में छेड़छाड़ की गई थी. वर्ष 2021 से उनकी जमीन का लगान रसीद कटना बंद हो गया. इसके चलते उन्होंने अपनी जमीन पर दावेदारी भी नहीं कर पाई. सीआइडी ने शिकायतों की जांच की तो प्रथमदृष्ट्या मामले को सत्य पाया और इसके बाद ही इस पूरे प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज की. शुरुआती जांच में 5 एकड़ जमीन के फर्जीवाड़े का पता चला था. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह घोटाला 200 एकड़ से अधिक जमीन तक फैल गया. इसमें कई पीड़ितों ने भी ईडी और अन्य जांच एजेंसियों से शिकायत की है.

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