CG DMF Scam Case Update: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) निधि घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी अपराध क्रमांक 02/2024 (DMF प्रकरण) में विस्तृत विवेचना के बाद की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार मामले में एकत्र किए गए डिजिटल साक्ष्य, दस्तावेज और गवाहों के बयान आरोपी की भूमिका की ओर स्पष्ट संकेत करते हैं।
कमीशन लेकर काम दिलाने का आरोप
विवेचना के दौरान प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह स्थापित हुआ है कि आरोपी ने DMF निधि से जुड़े विभिन्न कार्य अपने परिचितों और निजी फर्मों को कमीशन लेकर दिलवाए। जांच में यह भी सामने आया है कि कार्य आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता को दरकिनार कर लाभ पहुंचाने की संगठित व्यवस्था बनाई गई थी।
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रिश्तेदारों और करीबी लोगों के जरिए आवंटन
जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपी ने अपने रिश्तेदारों और निकट संबंधियों के माध्यम से अलग-अलग फर्मों को DMF मद के कार्य आवंटित कराने की गतिविधियां संचालित कीं। आरोप है कि इन कार्यों के बदले कमीशन लिया गया। डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग ट्रेल और संबंधित व्यक्तियों के बयान इस कथित नेटवर्क की पुष्टि करते हैं।
शासकीय धन के दुरुपयोग के संकेत
ACB के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ शासकीय धन के दुरुपयोग, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्ट आचरण से जुड़े संज्ञेय अपराध प्रथम दृष्टया स्थापित पाए गए हैं। जांच एजेंसियां अब वित्तीय लेनदेन और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।
कोर्ट ने 26 फरवरी तक रिमांड पर भेजा
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 26 फरवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। इस दौरान जांच एजेंसी आरोपी से विस्तृत पूछताछ कर नेटवर्क, लेनदेन और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करेगी।
प्रोडक्शन वारंट पर की गई गिरफ्तारी
बताया जा रहा है कि शराब घोटाला मामले में अनिल टुटेजा पहले से ही जेल में बंद थे। ACB ने उन्हें प्रोडक्शन वारंट के तहत हिरासत में लेकर इस मामले में गिरफ्तार किया है। इससे स्पष्ट होता है कि विभिन्न आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका की बहुस्तरीय जांच चल रही है।
DMF निधि क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है
डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) निधि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाई गई एक विशेष व्यवस्था है। इस निधि का उपयोग स्थानीय बुनियादी सुविधाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, आजीविका और पर्यावरण सुधार जैसे कार्यों के लिए किया जाता है।
जांच एजेंसियों के अनुसार इस निधि का उपयोग विकास कार्यों के बजाय कथित रूप से लाभकारी ठेकों और कमीशन आधारित आवंटन के लिए किया गया। इससे खनन प्रभावित क्षेत्रों के वास्तविक विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
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टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के संकेत
जांच में यह भी सामने आया है कि DMF फंड से जुड़े कार्यों के टेंडर आवंटन में अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि पात्रता और आवश्यकता के बजाय चयनित फर्मों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से निर्णय लिए गए।
वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्य
जांच के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड, संचार विवरण, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए गए हैं। इनसे कथित रूप से कार्य आवंटन, भुगतान और कमीशन व्यवस्था के बीच संबंधों की कड़ियां जुड़ने के संकेत मिले हैं।
और खुलासों की संभावना
जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
यह मामला सामने आने के बाद DMF निधि के उपयोग, निगरानी और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाए गए फंड का दुरुपयोग न केवल प्रशासनिक विफलता दर्शाता है बल्कि इससे स्थानीय समुदायों का भरोसा भी प्रभावित होता है।
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जांच जारी, आगे की कार्रवाई संभव
ACB और अन्य जांच एजेंसियां इस पूरे मामले में वित्तीय प्रवाह, निर्णय प्रक्रिया और कथित नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं। कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे और गिरफ्तारी या कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा रहा है। DMF निधि घोटाला राज्य के प्रशासनिक और वित्तीय तंत्र में पारदर्शिता की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करता है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और उससे जुड़े खुलासे इस मामले की गंभीरता को और स्पष्ट करेंगे।
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