MP: शहरों में सड़क-सीवेज और पानी के लिए 2800 करोड़ का कर्ज लेगी सरकार, चुकाने के लिए स्टांप ड्यूटी पर सेस और प्रॉप्रटी टैक्स बढ़ाने की तैयारी

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MP Government Loan: मध्यप्रदेश सरकार शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़ा वित्तीय कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना के पांचवें चरण के लिए सरकार करीब 5000 करोड़ की स्कीम लाने की तैयारी में है, जिसके लिए 2798.80 करोड़ रुपए का कर्ज लिया जाएगा। इस कर्ज और ब्याज की भरपाई जनता से स्टांप ड्यूटी पर लगने वाले सेस और प्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ोतरी के जरिए की जाएगी। नगरीय विकास विभाग ने कैबिनेट के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। इसे आगामी 8 दिसंबर को खजुराहो में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूर किया जा सकता है।

इस प्रस्ताव को आगामी 8 दिसंबर को खजुराहो में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूर किया जा सकता है।

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स्कीम कैसे चलेगी

यह योजना तीन साल में लागू होगी। पहले साल 2026 में 100 करोड़ रुपए, 2027 में 1932 करोड़ और 2028 में 2968 करोड़ खर्च किए जाएंगे। 2027 में नगर निगम, पालिका और परिषद के चुनाव तथा 2028 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में सरकार शहरी क्षेत्रों में सड़क, सीवेज, पानी और अन्य अधोसंरचना सुधार को तेज करना चाहती है। विभाग का कहना है कि अमृत 2.0 और स्वच्छ भारत मिशन जैसे कार्यक्रमों के बाद भी कई शहरों में पूरी कवरेज नहीं हो पाई है, इसलिए नया चरण आवश्यक है।

कर्ज चुकाने का फॉर्मूला

योजना के कुल 5000 करोड़ में से 2201.20 करोड़ रुपए अनुदान के रूप में आएंगे, जबकि बाकी राशि कर्ज से जुटाई जाएगी। इस कर्ज की अदायगी स्टांप ड्यूटी पर लगने वाले सेस से की जाएगी। अभी स्टांप ड्यूटी पर 3% उपकर लगता है। इसमें 1% राशि नगरीय निकायों को मिलती है और 2% विभाग अपने पुराने कर्ज चुकाने में उपयोग करता है। अब पांचवें चरण के लिए विभाग ने अतिरिक्त सुधार शुल्क या उन्नयन शुल्क लगाने का विकल्प रखा है, जिसे सीधे नागरिकों से वसूला जाएगा।

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प्रॉपर्टी टैक्स भी बढ़ सकता है

सरकार प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर भी एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। प्रस्ताव में कहा गया है कि बीते पांच वर्षों की औसत राज्य GDP ग्रोथ के बराबर प्रॉपर्टी टैक्स में न्यूनतम बढ़ोतरी की जाएगी। इसके अलावा हर नगर निकाय में लिए जाने वाले शुल्क भी समान किए जाएंगे, यानी जहां शुल्क कम हैं, वहां बढ़ोतरी होगी।

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नए फाइनेंसिंग मॉडल भी शामिल

सरकार इनोवेटिव फाइनेंसिंग पर भी काम करेगी। इसमें लैंड वैल्यू कैप्चर, पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप(PPP) और म्युनिसिपल या ग्रीन बांड जारी करने जैसे विकल्प शामिल होंगे। विभाग का मानना है कि इन उपायों से शहरों में अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त फंड जुटाया जा सकेगा।

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