सफेद चीनी से कितनी अलग है ब्राउन शुगर, क्या ये आपके लिए है फायदेमंद?

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चाय से लेकर डेजर्ट तक चीनी हमारे डेली लाइफ का एक अहम हिस्सा है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में लेना ही सही माना जाता है. ज्यादा शुगर कन्ज्यूम करते हैं तो इससे मोटापा हो सकता है और इस वजह से डायबिटीज, हार्ट से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं. मीठी चीजें ज्यादा खाने से दांतों में कैविटी होने की संभावना भी बढ़ जाती है. बॉडी को डेली रूटीन के कामों में एनर्जी बनाए रखने के लिए भी ग्लूकोज की आवश्यकता होती है, लेकिन इसे नेचुरल चीजों जैसे फल, मेवा, साबुत अनाज जैसे नेचुरल सोर्स से भी लिया जा सकता है. चीनी के अल्टरनेटिव की बात की जाए तो शहद से लेकर गुड़, स्टीविया, डेट सिरप और नारियल शुगर जैसे कई ऑप्शन हैं. इसके अलावा आपने ब्राउन शुगर का नाम भी सुना होगा. जान लेते हैं कि दोनों में क्या फर्क है और क्या ब्राउन शुगर फायदेमंद होती है.

मीठा खाने की बात आए तो लोग उसे अनहेल्दी बता देते हैं, इसलिए हर कोई चाहता है कि वो एक हेल्दी ऑप्शन चुने. ब्राउन शुगर देखने में नॉर्मल शुगर जैसी ही दानेदार होती है, लेकिन जैसा की इसका नाम है ये ब्राउन कलर की होती है. जान लेते हैं कि ब्राउन और वाइट शुगर में कलर के फर्क के अलावा भी क्या अंतर होता है. अगर आप उलझन में हैं तो जान लेते हैं कि ब्राउन शुगर कितनी हेल्दी है.

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कैसे बनती है सफेद चीनी?
सफेद चीनी को गन्ने के रस से तैयार किया जाता है. रस को निकालने के बाद हीटिंग प्रोसेस होता है, जिसे तीन स्टेप में कंप्लीट किया जाता है. सबसे पहले रॉ यानी कच्चे जूस को हीट किया जाता है, फिर सल्फेट जूस हीटिंग होती है और फिर क्लियर जूस हीटिंग. चीनी तैयार होने के बाद वह हल्के भूरे रंग की होती है, इसके बाद उसे क्रिस्टल क्लियर बनाने के लिए सल्फर डाइऑक्साइड का यूज किया जाता है.

White Or Brown Sugar

कैसे बनती है ब्राउन शुगर?
ब्राउन शुगर यानी भूरे रंग की चीनी…जिसके दाने बिल्कुल वाइट शुगर जैसे होते हैं. दरअसल इसे पूरी तरह से रिफाइन की गई शुगर में गुड़ एड करके तैयार किया जाता है. इस वजह से इसका रंग बदल जाता है और न्यूट्रिशन वैल्यू में भी थोड़ा सा फर्क आता है. इस चीनी का रंग कितना डार्क और हल्का रहेगा ये गुड़ की मात्रा पर निर्भर करता है.

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कितना है दोनों में फर्क?
सीधे तौर पर देखा जाए तो ब्राउन शुगर को वाइट शुगर से ही तैयार किया जाता है और उसमें सिर्फ गुड़ मिला होता है. गुड़ भी गन्ने के रस से ही तैयार होता है, लेकिन उसमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं जो उसे चीनी से थोड़ा बेहतर बनाते हैं. ब्राउन शुगर में पूरी तरह के गुड़ नहीं होता है, इसलिए उसमें थोड़ी मात्रा में ही गुड़ के न्यूट्रिएंट्स की मात्रा होती है.

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क्या है दोनों में फायदेमंद?
ब्राउन शुगर में गुड़ को मिलाए जाने की वजह से इसमें कुछ न्यूट्रिशन होते हैं, लेकिन अगर कैलोरी की बात की जाए तो ब्राउन शुगर और वाइट शुगर दोनों में ही बराबर मात्रा में कैलोरी होती है, इसलिए दोनों को ही ज्यादा मात्रा में खाने से सेहत को नुकसान होता है. चीनी को सीधे तौर पर अपनी डाइट में कम मात्रा में शामिल करना सही रहता है. डेली रूटीन में नेचुरल चीजों फल, मेवा, खाने की बाकी चीजों से शरीर में शुगर की मात्रा पूरी होती रहती है.



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