कितनी पढ़ाई की है अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने? पत्नी से लेकर करोड़ों की संपत्ति तक सबकुछ यहां जानें

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Aniruddhacharya: धार्मिक नगरी वृंदावन इन दिनों सुर्खियों में है. वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य (Aniruddhacharya) , फिर प्रेमानंद महाराज और फिर साध्वी ऋतंभरा के विवादित बयानों को लेकर गुस्से और समर्थन की लहर है.

‘पुकी बाबा’ अपने भक्ति प्रवचनों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए प्रसिद्ध हुए हैं. इस बीच, आइए जानें कि अनिरुद्धाचार्य जी महाराज की शिक्षा कितनी है और उनके पास कितनी संपत्ति है?

इतने पढ़े-लिखें हैं पुकी बाबा

Aniruddhacharya Maharaj’S

स्वामी अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya) जी का जन्म 27 सितंबर 1989 को मध्य प्रदेश के दमोह जिले के एक छोटे से गाँव रिवझा में हुआ था. बचपन से ही उनका रुझान धर्म और आध्यात्म की ओर था. अनिरुद्धाचार्य का वास्तविक नाम अनिरुद्ध राम तिवारी है. अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने कक्षा 5 तक पढ़ाई की, उसके बाद उन्होंने वृन्दावन जाकर संत गिर्राज शास्त्री जी महाराज से दीक्षा ली. उनके पिता एक मंदिर के पुजारी थे और उनका पालन-पोषण आध्यात्मिक वातावरण में हुआ.

बचपन में ही उन्होंने श्री राधा-कृष्ण के मंदिर में सेवा करना शुरू कर दिया और कम उम्र में ही रामचरितमानस और श्रीमद्भागवत का अध्ययन किया. उन्होंने सनातन धर्म का प्रचार करना शुरू कर दिया और भागवत कथा और प्रवचन सुनाना शुरू कर दिया.

कौन हैं Aniruddhacharya महाराज की पत्नी?

अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya) महाराज की पत्नी आरती तिवारी, जिन्हें गुरु माँ के नाम से भी जाना जाता है, एक भजन गायिका हैं. वह राधा-कृष्ण और राम जी के भजन गाती हैं और अपने गाए भजनों के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं. उनके भजन सुनने से भक्तों को आत्मिक शांति और आशीर्वाद मिलता है.अनिरुद्धाचार्य जी के कार्यों में न केवल धार्मिक गतिविधियाँ, बल्कि सामाजिक कार्य भी शामिल हैं.

वृंदावन में वृद्धाश्रम के अलावा, उन्होंने कई अन्य सामाजिक सेवा कार्यक्रम भी शुरू किए हैं. उनका मानना है कि समाज के हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ काम किया जाना चाहिए, चाहे वह बुजुर्ग हों या जरूरतमंद बच्चे।

Aniruddhacharya जी की कुल संपत्ति

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 में महाराज की अनुमानित कुल संपत्ति लगभग 25 करोड़ रुपये है. द बज़ मेल की रिपोर्ट के अनुसार, अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya) एक दिन की कथा के लिए 1 से 3 लाख रुपये लेते हैं, जबकि सात दिन की भागवत कथा से 10 से 15 लाख रुपए कमाए जा सकते हैं.

आय धार्मिक उपदेशों और वैश्विक आयोजनों, लाइव दान और प्रचार, यूट्यूब विज्ञापन राजस्व (अनुमानित ₹2 लाख/माह), प्रायोजन और सोशल मीडिया सहयोग से आती है.

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