वाराणसी : गिरधरपुर में डायरिया का प्रकोप, स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची गांव, दूषित पानी दे रहे हैंडपंपों को कराया बंद
वाराणसी। चिरईगांव क्षेत्र के डायरिया प्रभावित गिरधरपुर गांव में हालात को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और पंचायत विभाग की टीमें लगातार सक्रिय हैं। रविवार को मुख्य चिकित्साधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की जिलास्तरीय टीम ने गांव का भ्रमण किया और लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सतर्कता बरतने की सलाह दी।
टीम ने सबसे पहले प्रभावित मरीजों के घर जाकर हालात की जानकारी ली। निरीक्षण में पाया गया कि गांव के कई हैंडपंप दूषित पानी दे रहे थे। इसे गंभीरता से लेते हुए टीम ने प्रभावित और आसपास के परिवारों को ऐसे हैंडपम्प का उपयोग बंद करने की सख्त हिदायत दी। लोगों को समझाया गया कि फिलहाल जल जीवन मिशन के तहत लगी ओवरहेड टंकी से मिलने वाले शुद्ध पानी का ही उपयोग करें।

ग्रामीणों को जागरूक करते हुए टीम ने कहा कि पीने के पानी को उबालकर पीना चाहिए या फिर 20 लीटर पानी में एक क्लोरीन की गोली डालकर एक घंटे बाद उसका उपयोग करना चाहिए। साथ ही स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने और किसी भी असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत सूचना देने को कहा गया। टीम ने क्षेत्र की एएनएम और आशा कार्यकत्रियों को निर्देशित किया कि वे लगातार भ्रमण करें और किसी भी विपरीत परिस्थिति की तुरंत सूचना दें। एएनएम और आशा ने लोगों को क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस के पैकेट वितरित किए तथा इनके सही उपयोग की जानकारी दी।
इस टीम में जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. अमित सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. शरदचंद्र पांडेय, पीएचसी प्रभारी चिरईगांव डॉ. मनोज कुमार वर्मा, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक कमलसेन और मलेरिया निरीक्षक अनुराग मिश्रा शामिल रहे। पीएचसी प्रभारी ने बताया कि स्थिति अब सामान्य है और नए मरीज नहीं मिले हैं।

दूसरी ओर, एडीओ पंचायत चिरईगांव कमलेश कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ के कारण देसी हैंडपम्पों का जल स्तर दूषित हो गया है। इसी वजह से रविवार को गांव के आधा दर्जन देसी हैंडपम्प बंद करा दिए गए। ग्रामीणों को केवल इंडिया मार्का हैंडपम्प से पानी लेने की सलाह दी गई है। गांव में संक्रमण रोकने के लिए चूना, दवा का छिड़काव और फॉगिंग भी कराई गई। स्वास्थ्य विभाग, पंचायत विभाग और सफाईकर्मी लगातार गांव में मौजूद रहकर निगरानी कर रहे हैं।