Indian Hockey 100 Years Celebration: 100 साल की हुई भारतीय हॉकी, 1960 तक जीते 8 गोल्ड, फिर 65 साल से क्यों नहीं ला पाए सोना ? इस पर ओलंपियंस ने क्या कहा

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हाइलाइट्स

  • भारतीय हॉकी ने पूरे किए 100 साल
  • मेजर ध्यानचंद के बेटे ने दी सीख
  • असलम शेरखान बोले- गोरों ने टोटल हाॅकी बदली

Indian Hockey 100 Years Celebration: भारतीय हॉकी 7 नवंबर 2025 को पूरे 100 साल की हो गई। पूरे देश में इसका जश्न मनाया जा रहा है। शुरुआती 35 साल में हिन्दुस्तान ने ओलंपिक में 8 गोल्ड मेडल जीते हैं। जो आज भी एक रिकॉर्ड है। 1980 से 2020 तक यानी 40 साल के सूखे के बाद ब्रॉन्ज मेडल से फिर ओलंपिक हॉकी में मेडल की शुरुआत हुई है। कुल मिलाकर बाद के 65 साल में भारत, ओलंपिक हॉकी गोल्ड के लिए तरसते रहा। हालांकि, इस बीच 1975 में देश को हॉकी खिलाड़ियों ने बड़ा जश्न मनाने का मौका दिया… जब भारत ने वर्ल्ड कप जीती। इन उतार-चढ़ाव की क्या वजह रहीं ? साथ ही क्रिकेट की तुलना में हॉकी क्यों पिछड़ गई ? हॉकी को कब राष्ट्रीय खेल का दर्जा मिलेगा ? इन कुछ सवालों के जवाब जाने के लिए हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के बेटे और ओलंपियन अशोक कुमार, वर्ल्ड कप विजेता टीम के खिलाड़ी असलम शेर खान और अर्जुन अवॉर्डी सैयद जलालउदीन रिजवी से खास बातचीत की।

ओलंपिक गोल्ड जीतने में अब भी सबसे ऊपर 

Indian Hockey 100 Years Celebration: 100 साल की हुई भारतीय हॉकी, 1960 तक जीते 8 गोल्ड, फिर 65 साल से क्यों नहीं ला पाए सोना ? इस पर ओलंपियंस ने क्या कहा
अशोक ध्यानचंद।

अशोक ध्यानचंद ने कहा कि हमारे स्वर्णिम काल को दुनिया को कोई देश अब तक नहीं छू सका है। ओलंपिक में सबसे ज्यादा 8 गोल्ड जीतकर अब भी हिंदुस्तान सबसे ऊपर है। 1960 के बाद गोरों ने हमारी हॉकी को डैमेज किया। एस्ट्रोटर्फ पर हॉकी होने लगी, कलात्मक हॉकी का दौर जाता रहा। इसका खामियाजा 40 साल तक सूखे के रूप में देखने को मिला। पिछले दो ओलंपिक से हॉकी ने फिर से ट्रैक पर लौटी है। भारतीय पुरुष टीम ब्रॉन्ज मेडल लेकर लौटी है।

स्कूलों में हॉकी खत्म हो गई

जहां तक 100 में हॉकी के विकास की बात है तो ग्रास रुट… जैसे स्कूल-कॉलेजों में हॉकी ना के बराबर रह गई। शहरों में मैदान खत्म हो गए हैं। बच्चे कहां जाएं… हॉकी खेलने। स्कूलों में विलुप्त सी हो गई है हॉकी। स्कूलों में हॉकी होनी चाहिए। औबेदुल्ला जैसा हॉकी टूर्नामेंट बंद हो गया। असलम शेर खान इस बार टूर्नामेंट करवाने वाले थे, उन्हें अनुमति नहीं मिली।

1975 हाॅकी विश्व कप विजेता भारतीय टीम। इंडिया ने अब तक सिर्फ एक बार वर्ल्ड कप जीता है।

क्रिकेट में एक खिलाड़ी मैच जिता देता है, हाॅकी में ऐसा नहीं

विश्व कप चैंपियन टीम के फारवर्ड रहे अशोक ध्यानचंद ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं अब हम हॉकी से गोल्ड के प्रयास में बढ़ रहे हैं।
हॉकी और क्रिकेट की तुलना से सवाल पर उन्होंने कहा, क्रिकेट में एक खिलाड़ी मैच जीता देता है, जबकि हॉकी में ऐसा नहीं होता। उन्होंने कहा, हॉकी में जितने ओलंपिक गोल्ड हैं, उतने क्रिकेट में हैं ?

‘मेजर ध्यानचंद ने हॉकी पूरी निष्ठा से खेली’

जहां तक विकास की बात करें तो उम्मीद करते हैं कि हॉकी में आगे अच्छा काम होगा। अशोक ध्यानचंद ने कहा, स्कूलों में हॉकी होनी चाहिए हम यह उम्मीद करते हैं
अशोक कुमार ने कहा कि मेजर ध्यानचंद ने निष्ठा, समर्पण और निस्वार्थ भाव से हॉकी खेली और खेल को बड़े मुकाम तक पहुंचाया…यह सभी को पता है।

टोक्यो ओलंपिक 2020 की ब्राॅन्ज मेडिलिस्ट भारतीय पुरुष हाॅकी टीम। टीम ने यह मेडल 40 साल के अंतराल के बाद जीता।

शुरुआती 50 साल में हॉकी ने बहुत ऊंचाइयां छुईं

असलम शेर खान।

असलम शेर खान ने कहा, हॉकी वो ऊंचाइयां तो छू ही नहीं सकती, जो 1925 से 1960-64 तक कह सकते हैं। शुरुआती के करीब 50 साल तक तो बहुत ऊंचाइयां छुई हैं। 1928 से गोल्ड मेडल जीतने का सिलसिला 1964 तक चला। फिर गेप आ गया। फिर लगातार दो-तीन ब्रॉन्ज मेडल आए। उसके बाद 40 साल टोटल हॉकी बदलने के कारण ऐसा हुआ। हॉकी आर्टीफिशियल सरफेस पर आ गई। स्टिक और बॉल बदल गई। रूल्स बदल गए। फिटनेस और पावर पर हॉकी चली गई। भारतीय हॉकी पहचान आर्टीस्टिक हॉकी रही है। पाकिस्तान के अलग होने के बाद गोरों (अंग्रेज) को यह लगा कि इंडिया नहीं तो पाकिस्तान मेडल जीत ले जाएगा। इसस गोरों ने टोटल गेम को ही चेंज कर दिया। मौजूदा भारतीय हॉकी से असलम शेर खान संतुष्ट हैं।
उन्होंने कहा, अब हॉकी के बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने की जरूरत है।

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