Lalitpur: पहली बारिश में बहा नया घाट, भ्रष्टाचार की पोल खुली

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ललितपुर जनपद के विकासखंड बार क्षेत्र के चंदावली गांव में दुनातर मंदिर के पास नदी पर बनाए जा रहे घाट का निर्माण पहली ही बारिश में बह जाने से ग्रामीणों में आक्रोश है। यह घाट जिला पंचायत द्वारा कराया जा रहा था, लेकिन घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और अनियमितता के चलते पहली बरसात में ही ढह गया। इससे न सिर्फ ग्रामीणों की आस्था को ठेस पहुंची, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की भी परतें खुलती नजर आ रही हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि इस घाट का निर्माण मंदिर पर लगने वाले संक्रांति मेले में स्नान के लिए करवाया गया था, ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके। लेकिन चार सीढ़ियों तक बने इस घाट की दीवारें और संरचना पहली बरसात में ही पानी के बहाव से पूरी तरह टूट गईं। मौके पर देखा गया कि घाट में न तो सरिया डाला गया था और न ही पर्याप्त मात्रा में सीमेंट और बालू का इस्तेमाल किया गया था। ठेकेदार ने डस्ट और थोड़े से सीमेंट में ही पूरा घाट बना दिया, जो पहली बारिश में धराशायी हो गया।

स्थानीय लोगों ने बताया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शंका जताई गई थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। उनका कहना है कि ठेकेदार और जूनियर इंजीनियर की मिलीभगत से यह घटिया निर्माण किया गया, जिसमें भारी भ्रष्टाचार की बू आ रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब पहली बारिश में ही घाट बह गया, तो इसके भविष्य की क्या गारंटी है?

लोगों ने यह भी बताया कि मंदिर पर सालाना लगने वाले मेले में हजारों श्रद्धालु आते हैं, जो इस घाट का उपयोग स्नान के लिए करते हैं। लेकिन इस बार घाट की हालत देखकर लोग निराश हैं। अगर समय रहते इसकी मरम्मत और दोबारा मजबूत निर्माण नहीं किया गया, तो भविष्य में श्रद्धालुओं के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।

घाट की ढहने की घटना ने जिला पंचायत की कार्यप्रणाली और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जब इस निर्माण में गुणवत्ता के मानक पूरी तरह नजरअंदाज किए गए, तो बाकी निर्माण कार्यों की हालत भी ऐसी ही होगी।

अब देखना यह होगा कि जिला पंचायत और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच के लिए टीम गठित की जाए।

वहीं कुछ लोगों को आशंका है कि यह मामला भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा और दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इस घाट के गिरने की घटना ने साफ कर दिया है कि निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार और मिलीभगत की जड़ें कितनी गहरी हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

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