MP IAS Santosh Verma Controversy: IAS संतोष वर्मा को शो-कॉज नोटिस जारी, 7 दिन में देना होगा जवाब वरना होगी एकतरफा कार्रवाई

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MP IAS Santosh Verma Controversy Show Cause Notice: भोपाल में IAS संतोष कुमार वर्मा के विवादित बयान को लेकर मचा बवाल रुकने का नाम नहीं ले रहा। राज्य शासन ने बुधवार, 26 नवंबर को अधिकारी को आचरण और नियम उल्लंघन के आरोप में कारण-बताओ नोटिस (IAS Santosh Verma Show Cause Notice) जारी कर दिया है। 

नोटिस के अनुसार, संतोष वर्मा को 7 दिनों के भीतर जवाब देना होगा, अन्यथा सरकार एकतरफा कार्रवाई कर सकती है। यह विवाद तब भड़का जब संतोष वर्मा ने एक कार्यक्रम में आरक्षण और ब्राह्मण समाज को लेकर विवादित टिप्पणी की, जिस पर सोशल और धार्मिक संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई है।

IAS Santosh Verma Show Cause Notice

देशभर में विरोध, FIR की मांग तेज

इससे पहले MP नगर थाना (bhopal latest news) में मंगलवार को अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने ज्ञापन सौंपकर FIR और तत्काल निलंबन की मांग की। संगठन की महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सावित्री तिवारी ने उग्र रूप अपनाते हुए कहा कि संतोष वर्मा के बयान से समाज की बेटियों का अपमान हुआ है। 

उन्होंने चेतावनी दी-  “कार्रवाई नहीं हुई तो हम प्रदेशव्यापी आंदोलन करेंगे।” कुछ वक्ताओं ने मंच से बेहद आक्रामक शब्दों का इस्तेमाल कर कार्रवाई न होने पर “सर धड़ से अलग करने” जैसी चेतावनी भी दी, जिसके कारण पुलिस प्रशासन की सतर्कता बढ़ गई है।

51000 रुपये इनाम की घोषणा 

राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती प्रसाद शुक्ल (Bhagwati Prasad Shukla, National President of Rashtriya Sanatan Sena) ने वीडियो जारी कर IAS संतोष वर्मा का मुंह काला करने वाले को 51,000 रुपए इनाम देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ऐसा बयान समाज को बांटने वाला है और किसी भी समुदाय की बेटियां सम्मान का विषय होती हैं। शुक्ल ने संतोष वर्मा को “आतंकवादी मानसिकता” वाला बताते हुए सरकार से जल्द कार्रवाई करने की मांग की। इन बयानों के वायरल होने के बाद भोपाल पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है।

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संगठनों का आरोप- ‘376 समेत कई मामलों की जांच लंबित’

अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पंडित पुष्पेंद्र मिश्र ने कहा कि संतोष वर्मा का विवादित व्यवहार नया नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पहले भी अधिकारी पर धारा 376, फर्जी दस्तावेज़ बनाने और कूटरचित हस्ताक्षर जैसे गंभीर मामलों में शिकायतें दर्ज हैं। मिश्र ने कहा- “ऐसे व्यक्ति के पद पर रहने से जातीय तनाव बढ़ सकता है। सरकार कार्रवाई नहीं करेगी तो यह आंदोलन पूरे भारत में फैलेगा।”

विवेक त्रिपाठी सहित अन्य पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि वर्मा ने वर्षों से कई शिकायतों के बावजूद लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया है, और प्रशासन को तत्काल उन्हें हटाना चाहिए ताकि प्रदेश में जातीय संघर्ष की स्थिति न बने।

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सरकार और पुलिस अलर्ट, बयान की जांच शुरू

सरकारी सूत्रों के अनुसार, संतोष वर्मा के बयान के वीडियो और भाषण का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। प्रशासन इस विवाद को संवेदनशील मानते हुए सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भड़काऊ कंटेंट पर भी निगरानी कर रहा है।

सूत्र बताते हैं कि सरकार “शून्य सहनशीलता” नीति के तहत इस विवाद पर सख्त रुख अपनाने के मूड में है, क्योंकि मामला सामाजिक सौहार्द और महिला सम्मान से जुड़ा है।

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