मुजफ्फरनगर बाईपास को नई रफ्तार: नितिन गडकरी ने ₹ 419.47 करोड़ की परियोजना को दी मंजूरी
प्रदेश सरकार में मंत्री एवं नगर विधायक कपिल देव की मांग पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश में मेरठ-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग-58 (NH-58) पर स्थित मुजफ्फरनगर बाईपास के आरंभिक भाग के लिए ₹419.47 करोड़ की लागत वाली महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। इससे लंबे समय से प्रतीक्षित बाईपास परियोजना को गति मिल गई है।
6-लेन फ्लाईओवर और हाईवे चौड़ीकरण होगा शामिल
मंत्री कपिल देव ने जानकारी दी कि इस परियोजना के तहत मुजफ्फरनगर बाईपास के प्रारंभिक बिंदु पर 6-लेन फ्लाईओवर का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही सहायक मार्गों का विकास और वर्तमान 4-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग को 6-लेन तक चौड़ा किया जाएगा। इससे क्षेत्रीय और अंतरराज्यीय यातायात को बेहतर क्षमता, गति और सुगमता मिलेगी।
वेहलना चौक की जाम समस्या से मिलेगी राहत
परियोजना का प्रमुख उद्देश्य मुजफ्फरनगर शहर में प्रवेश और निकास करने वाले भारी वाहनों के कारण वेहलना चौक के आसपास उत्पन्न होने वाली यातायात बाधाओं को समाप्त करना है। इसके पूरा होने से दिल्ली-उत्तराखंड कॉरिडोर पर यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और माल परिवहन, तीर्थ यात्रियों व पर्यटन से जुड़े यातायात को बड़ा लाभ मिलेगा।
आधुनिक जंक्शन, स्लिप रोड और ग्रेड-सेपरेटेड संरचनाएं
परियोजना के अंतर्गत प्रमुख चौराहों पर ग्रेड-सेपरेटेड संरचनाओं का निर्माण, जंक्शनों का सुधार एवं आधुनिकीकरण, क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाओं का चौड़ीकरण तथा सुरक्षित और सुचारु आवागमन के लिए स्लिप रोड का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना नियोजित शहरी विस्तार को प्रोत्साहित करते हुए रिबन डेवलपमेंट को भी बढ़ावा देगी।
सड़क सुरक्षा के लिए ब्लैकस्पॉट पर अंडरपास
सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए दुर्घटना-संभावित स्थलों (ब्लैकस्पॉट) पर वाहन अंडरपास (VUP) का निर्माण भी प्रस्तावित है। इससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी और स्थानीय यातायात के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग की सुविधा उपलब्ध होगी।
आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
यह परियोजना मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था को आधुनिक और सुचारु बनाने के साथ-साथ क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक परिवहन, कृषि आपूर्ति श्रृंखला और धार्मिक पर्यटन को भी महत्वपूर्ण प्रोत्साहन देगी। कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास में एक अहम मील का पत्थर साबित होगा।