नोएडा प्राधिकरण का बड़ा फैसला: स्टॉल्ड रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स नीति रहेगी जारी

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घर खरीदारों को राहत देने और लंबे समय से अटकी आवासीय परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से नोएडा प्राधिकरण ने एक अहम निर्णय लिया है। प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश सरकार की स्टॉल्ड रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स नीति को जारी रखने का फैसला किया है। इसके तहत उन बिल्डरों को भी नीति का लाभ मिलता रहेगा, जिन्होंने तय समय-सीमा में पुनर्गणना की गई बकाया राशि का अनिवार्य 25 प्रतिशत हिस्सा जमा नहीं किया था

बोर्ड बैठक में लिया गया निर्णय, पुराना प्रस्ताव वापस

यह निर्णय 3 जनवरी को हुई नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में लिया गया। बैठक में 21 दिसंबर 2023 को जारी राज्य सरकार के उस आदेश को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई, जिसे पहले ही कैबिनेट से स्वीकृति मिल चुकी है। इसके साथ ही बोर्ड ने अपने उस पुराने प्रस्ताव को भी पलट दिया, जिसमें गैर-अनुपालन करने वाले बिल्डरों से नीति के सभी लाभ वापस लेने की सिफारिश की गई थी।

57 परियोजनाएं नीति के दायरे में

अमिताभ कांत की सिफारिशों के आधार पर कुल 57 रियल एस्टेट परियोजनाओं को इस नीति के दायरे में लाया गया था। इनमें से 31 दिसंबर 2025 तक 36 परियोजनाओं के डेवलपर्स ने नीति का लाभ लिया, जो कुल का लगभग 60 प्रतिशत है। इनमें:-

  • 4 परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनमें सहमति देने के बाद भी कोई भुगतान नहीं किया गया।

  • 11 डेवलपर्स ने 25 प्रतिशत राशि के मुकाबले आंशिक भुगतान किया।

  • 36 डेवलपर्स ऐसे हैं, जिन्होंने प्रारंभिक 25 प्रतिशत राशि जमा करने के बाद आगे कोई भुगतान नहीं किया।

872 करोड़ रुपये जमा, हजारों फ्लैट खरीदारों को राहत

अब तक कुल 872.12 करोड़ रुपये की राशि नोएडा प्राधिकरण में जमा कराई जा चुकी है। इसके आधार पर 6,855 फ्लैट खरीदारों के पक्ष में रजिस्ट्री की अनुमति दी गई। इनमें से 4,134 फ्लैटों की रजिस्ट्री पहले ही पूरी हो चुकी है। बोर्ड ने शेष पात्र मामलों में भी शीघ्र रजिस्ट्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

बकाया चुकाने वाले बिल्डरों को मिलेगा अवसर

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम ने बोर्ड को बताया कि चूंकि अटकी परियोजनाओं से जुड़ी यह नीति राज्य सरकार की है, इसलिए इसे पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। जो बिल्डर बकाया राशि चुकाने के लिए तैयार हैं, उन्हें एक अवसर दिया जाना चाहिए। बोर्ड ने इस पर सहमति जताते हुए निर्णय लिया कि डिफॉल्टर परियोजनाओं के मामलों की व्यक्तिगत समीक्षा की जाएगी और सभी परियोजनाओं के लाभ एक साथ वापस नहीं लिए जाएंगे।

21 हजार से अधिक फ्लैट थे अनरजिस्टर्ड

बोर्ड को यह भी बताया गया कि नीति लागू होने के समय 57 परियोजनाओं में कुल 21,034 फ्लैटों की रजिस्ट्री लंबित थी। डेवलपर्स द्वारा किए गए भुगतान के अनुपात में अब तक 6,855 फ्लैटों के पंजीकरण की अनुमति दी गई है। 31 दिसंबर 2025 तक 4,134 फ्लैटों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, जिससे हजारों घर खरीदारों को बड़ी राहत मिली है।

घर खरीदारों के लिए राहत की उम्मीद

नोएडा प्राधिकरण के इस फैसले से अटकी परियोजनाओं में फंसे हजारों घर खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह निर्णय रियल एस्टेट सेक्टर में भरोसा बहाल करने और लंबित परियोजनाओं को पूरा कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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