सनातन संस्कृति पर टिप्पणी करना अब पड़ेगा भारी, नेताओं के खिलाफ भी रामकसम पत्र जारी होगा, घर-घर खिलाई जाएगी कसम

0


वाराणसी। अखिल भारतीय व्यास संघ द्वारा पातालपुरी मठ, नरहरिपुरा में राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन किया गया। अधिवेशन में देशभर से 10,000 से अधिक कथा करने वाले व्यास शामिल हुए। इसका मुख्य उद्देश्य सनातन संस्कृति और धर्म की रक्षा, धर्मान्तरण एवं गऊ तस्करी जैसी सामाजिक कुरीतियों पर रोक लगाना और रामराज्य की स्थापना की दिशा में रणनीति तैयार करना बताया गया।

अधिवेशन की शुरुआत राष्ट्रीय अध्यक्ष जगद्गुरु बालकदेवाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में भगवान राम मंदिर में ज्योति जलाकर की गई। अधिवेशन में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें प्रमुख हैं:

  • धर्म और संस्कृति का अपमान करने वाले नेताओं के खिलाफ जन बहिष्कार: ऐसे नेताओं और उनकी पार्टियों के खिलाफ रामकसम पत्र घर-घर वितरित किया जाएगा। हर कथा वाचक अपने संबोधन में लोगों को रामकसम दिलाएगा।
  • धर्मान्तरण रोकने की पहल: व्यास पीठ द्वारा दलित बस्तियों में जाकर संस्कृति और संस्कार की शिक्षा दी जाएगी और धर्मान्तरण कराने वालों से लोगों को अवगत कराया जाएगा।
  • गऊ तस्करी में शामिल अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही: गऊ तस्करों के साथ मिलीभगत करने वाले पुलिस कर्मियों पर कठोरतम कार्रवाई हो और अधर्म से कमाए गए धन को सरकार जब्त करे।
  • रामकथा से आगे अभियान: कथा वाचक अब केवल रामकथा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि देशव्यापी अभियान चला कर रामराज्य की तैयारी करेंगे।
  • प्रधानमंत्री से मुलाकात: कथा वाचकों का प्रतिनिधि मंडल प्रधानमंत्री से मिलकर संतों और मठों की समस्याओं से अवगत कराएगा।
  • गांव-गांव रामभक्ति का प्रसार: भारत के 6 लाख गांवों को संतो और व्यासों द्वारा गोद लिया जाएगा, ताकि घर-घर तक रामभक्ति और सनातन संस्कृति पहुँचे।
  • पद यात्रा और संस्कार शिक्षा: गांवों और बस्तियों में संतो द्वारा पद यात्रा की जाएगी और परिवारों में संस्कार और धार्मिक जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
  • पूर्वजो की गाथाओं का प्रचार: सनातन संस्कृति और परंपराओं से जुड़े पूर्वजो की गाथाओं को जन-जन तक पहुँचाया जाएगा।
  • रामकसम की रस्म: राम द्रोहियों को माफ नहीं किया जाएगा और उनके खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
  • धार्मिक ग्रंथों का अपमान करने वालों को बहिष्कार: धार्मिक ग्रंथ जलाने या धर्म के खिलाफ टिप्पणी करने वालों को मठ-मंदिर में प्रवेश और कार्यक्रमों में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  • प्रकृति और जल संरक्षण: कथा वाचक नफरत की बजाय प्रेम को आधार बनाएंगे और प्रकृति, जल संरक्षण हेतु कार्य करेंगे।
  • घर-घर रामपाती वितरण: सनातन संस्कृति का धर्मादेश और जीवन जीने के तरीके घर-घर रामपाती के माध्यम से भेजा जाएगा।
  • अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष जगद्गुरु बालकदेवाचार्य जी महाराज ने कहा कि कथा के माध्यम से व्यास करोड़ों लोगों तक पहुँचते हैं। सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार से ही मानवता बच सकती है। उन्होंने कहा कि धर्म और नैतिकता के मूल्य केवल सनातन संस्कृति में ही जीवित हैं, और इन्हें संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

a

इस अवसर पर प्रमुख संत और व्यास शामिल थे, जिनमें पंडित दिनेश त्रिपाठी, पंडित डा. मदन मोहन मिश्र, पंडित शिवाकांत मिश्र, डा. महंत श्रवणदास, डा. महंत अवध किशोर दास, महंत राघव दास, पं. गंगा सागर पाण्डेय, पं. अच्युतानन्द पाठक, पं. धर्मराज शास्त्री, पं. विद्यासागर पाण्डेय, आचार्य अरविन्द, पं. सच्चिदानंद त्रिपाठी, पं. सुधीर तिवारी, डा. पुण्डरीक शास्त्री, पं. सुरेश मिश्रा, पं. वेद प्रकाश मिश्र, पं. विश्धकांताचार्य, पं. दिनकर शास्त्री, आशीष चतुर्वेदी, कृष्ण कुमार दीक्षित, पं. देवेश शास्त्री, राघवेंद्र पाण्डेय, आचार्य रहीश मिश्र, पं. अभिषेक पाठक, आचार्य ह्यग्रीवाचार्य, आचार्य पुरंदर पाण्डेय, आचार्य भगवती प्रसाद शुक्ल, पं. गजेंद्र शास्त्री आदि शामिल रहे।

अधिवेशन ने सनातन संस्कृति के संरक्षण, धर्म की रक्षा और रामराज्य स्थापना की दिशा में एक नई दिशा और जन-जागरूकता अभियान को गति देने का संदेश दिया।



Leave A Reply

Your email address will not be published.