गांव-गांव में प्यास से हाहाकार, नेहरा में बह रहा शुद्ध पानी – कौन जिम्मेदार?

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दरभंगा प्रशासन दिन-रात लोगों के घरों तक पेयजल पहुंचाने का लगातार प्रयास में जुटा है। इसके लिए दरभंगा डीएम कौशल कुमार को लगातार लोग दुआएं दे रहे, उनकी कार्यों की प्रशंसा कर रहे। इधर, जहां गांव-गांव में प्यास से हाहाकार, वहीं नेहरा में बह रहा शुद्ध पानी – कौन जिम्मेदार? इस बड़े सवाल के साथ यह खबर आगे विस्तार लेगा कि पानी के लिए तरस रहे गांव, लेकिन नेहरा में समरसेबल से हो रही जल की बर्बादी! एक तरफ जल संकट, दूसरी ओर सरकारी समरसेबल से बह रहा पानी, आखिर क्यों? कौन जिम्मेदार है?कौन एक्शन लेगा?

नेहरा की गलती, पूरे प्रखंड की सजा – ‘इंतजार’ मूसलाधार बारिश का?

नेहरा गांव में जनता नाराज़। नेहरा में लाखों खर्च कर खड़ा किया जल मोचक! न नल, न पाइप, बस बर्बादी। PHD विभाग भी कर रहा ‘इंतजार’ मूसलाधार बारिश का? जमीनी हकीकत कुछ और ही कहती है। नेहरा की गलती, पूरे प्रखंड की सजा – समरसेबल से बर्बाद हो रहा पानी, लोग एक बूंद को तरस रहे@मनीगाछी-दरभंगा,देशज टाइम्स।

दरभंगा के मनीगाछी में एक ओर जल संकट, दूसरी ओर नेहरा गांव में समरसेबल से हो रही जल की बर्बादी

मनीगाछी/दरभंगा,  एक तरफ पूरा इलाका पेयजल संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर नेहरा गांव में सरकारी योजना के तहत लगाए गए समरसेबल से लगातार पानी की बर्बादी हो रही है। यह स्थिति ग्रामीणों के बीच आक्रोश और सरकारी उदासीनता को उजागर कर रही है।

जमीन पर पानी नहीं, सिर्फ दावे

क्षेत्र प्रभावित पंचायतें विवरण
प्रमुख जलसंकट प्रभावित पंचायतें नेहरा पूर्वी, राघोपुर पश्चिम, जगदीशपुर, ब्रह्मपुरा, भट्टपुरा, राजे चनौर, बलौर सहित 12+ पंचायतें
कारण जलस्तर गिरना, नल-जल योजना की विफलता
प्रशासनिक दावा मोटर और पाइपलाइन मरम्मत की बात कही जा रही है
जमीनी हकीकत पीएचडी विभाग की निष्क्रियता, पानी अब भी नहीं मिल रहा

जहां जरूरत नहीं, वहीं लगा समरसेबल – नेहरा में योजनागत विफलता

नेहरा पूर्वी पंचायत के नेहरा गांव में पेयजल संकट के नाम पर तीन समरसेबल लगाए गए हैं। लेकिन जिन जगहों पर जल संकट अधिक था, उन्हें नजरअंदाज कर ऐसे वार्डों में बोरिंग किए गए जहाँ जनसंख्या कम है। इसके अलावे, न तो नल लगाया गया, न पाइपलाइन। बिजली चालू होते ही समरसेबल से लगातार पानी बहता रहता है।पानी का कोई  उपयोग नहीं, सिर्फ बर्बादी। इससे साफ है कि यह योजना बिना प्लानिंग और निगरानी के लागू की गई, जिससे जल का दुरुपयोग हो रहा है और ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल रहा।

जनता का सवाल – क्या पीएचडी विभाग केवल वर्षा का इंतजार कर रहा है?

जहां प्रशासन का दावा है कि नल-जल योजना को दुरुस्त किया जा रहा है, वहीं पेयजल संकट और जल बर्बादी साथ-साथ चल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी मूसलाधार बारिश का इंतजार कर रहे हैं, न कि योजनाओं को जमीन पर उतारने में रुचि दिखा रहे हैं।

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