आईएएस संतोष वर्मा प्रमोशन विवाद: फर्जी आदेश मामले में जमानत देने वाले सेशन जज का तबादला, इंदौर से रामपुर भेजे गए

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IAS Santosh Verma Controversy Update: आईएएस संतोष वर्मा से जुड़े फर्जी न्यायिक आदेश मामले में एक अहम प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। इस प्रकरण में आरोपियों को जमानत देने वाले इंदौर जिला न्यायालय में पदस्थ सेशन जज का तबादला कर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट जबलपुर के रजिस्ट्रार जनरल (Registrar General) ने सेशन जज प्रकाश कसेरा का तबादला आदेश जारी किया है। आदेश के तहत उन्हें इंदौर जिला न्यायालय से हटाकर सीधे रामपुर सेशन कोर्ट में पदस्थ किया गया है। यह तबादला आदेश एक दिन पहले पारित किया गया।

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आईएएस संतोष वर्मा से जुड़ा है मामला

पूरा मामला वर्ष 2021 का है, जब इंदौर की एमजी रोड थाना पुलिस ने आईएएस संतोष वर्मा से संबंधित एक फर्जी न्यायिक आदेश तैयार किए जाने के आरोप में केस दर्ज किया था। जांच में सामने आया था कि यह आदेश न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। इस प्रकरण ने उस समय न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए थे।

आईएएस संतोष वर्मा।

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टाइपिस्ट नीतू सिंह भी हैं आरोपी

इस केस में इंदौर में पूर्व में पदस्थ रहे जज वीरेंद्र सिंह रावत आरोपी हैं, जिन्हें बाद में निलंबित कर दिया गया था। उनके साथ उनकी कोर्ट में पदस्थ टाइपिस्ट नीतू सिंह भी इस मामले में आरोपी हैं।

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सेशन जज प्रकाश कसेरा ने इस मामले में पहले निलंबित जज वीरेंद्र सिंह रावत को अग्रिम जमानत दी थी। इसके अलावा, टाइपिस्ट नीतू सिंह को पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद रिमांड अवधि के दौरान 19 दिसंबर  को जमानत दी गई थी।

फर्जी न्यायिक आदेश के सहारे IAS प्रमोशन का आरोप

आईएएस संतोष वर्मा पर भारतीय प्रशासनिक सेवा का अवॉर्ड हासिल करने के लिए फर्जी न्यायिक आदेश तैयार कराने के गंभीर आरोप लगे हैं। बताया गया कि सीबीआई और व्यापमं के विशेष न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत के फर्जी हस्ताक्षर कर कोर्ट का आदेश बनाया गया, ताकि उनके खिलाफ दर्ज मामलों को समाप्त दिखाया जा सके। उस समय संतोष वर्मा नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग में पदस्थ थे। नियमों के अनुसार राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस में प्रमोशन से पहले अधिकारी के चरित्र और आपराधिक मामलों की जांच होती है और मामूली अपराध होने पर भी आईएएस अवॉर्ड रोका जा सकता है।

इस बीच वर्मा पर दो युवतियों ने शादी का झांसा देकर शोषण करने की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि इन मामलों में राहत मिलने का दावा करते हुए उन्होंने फर्जी कोर्ट आदेश पेश किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर की एमजी रोड थाना पुलिस ने जून 2021 में न्यायाधीश की रिपोर्ट के आधार पर धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का केस दर्ज किया। जिला कोर्ट और हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां दिसंबर 2021 में उन्हें जमानत मिली।

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