BIHAR के वो शिक्षक जो बने बच्चों के रोल मॉडल – ‘टीचर ऑफ द मंथ’ में नाम दर्ज, देखें लिस्ट कौन हैं सबसे बेहतरीन शिक्षक?

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पटना, – बिहार के 61 सरकारी शिक्षक बने ‘टीचर ऑफ द मंथ’ – बिहार के सरकारी स्कूलों में चमके ये शिक्षक! ‘Teacher of the Month’ में मिला प्रदेश स्तरीय सम्मान। जानिए किन जिलों को मिला सम्मान। जहां,

सीतामढ़ी, समस्तीपुर समेत इन जिलों के गुरुओं ने बढ़ाया मान

बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने राज्यभर के सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए “टीचर ऑफ द मंथ” योजना की शुरुआत की है। अप्रैल 2025 के लिए विभाग ने 61 शिक्षकों का चयन कर उन्हें प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया है। इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को प्रोत्साहित कर शिक्षण कार्य में नवाचार और समर्पण को बढ़ावा देना है।

टीचर ऑफ द मंथ: अप्रैल के विजेता शिक्षक

उल्लेखनीय चयन: वैशाली (जनदाहा): मो. अजहर, नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, चक्काजायब, सुपौल (छातापुर): नरेश कुमार निराला, केवला प्राथमिक विद्यालय, सीतामढ़ी (पुपरी): अनुराधा कुमारी, परसौनी मध्य विद्यालय, समस्तीपुर (पूसा): मुकेश कुमार ‘मृदुल’, दिघरा उच्च माध्यमिक विद्यालय, सुपौल (जगतपुर): दीप शिखा, मध्य विद्यालय शामिल हैं।

अन्य सम्मानित शिक्षक:

 जानकारी के अनुसार अन्य सम्मानित शिक्षकों में समस्तीपुर (हुसनपुर): बैद्यनाथ रजक, कन्या प्राथमिक विद्यालय, मालदह, पूर्णिया (मंझेलीहाट): बिरजू कुमार, मध्य विद्यालय, कसवा (मुसहरी टोला): उषा कुमारी, प्राथमिक विद्यालय, ठाकुरबाड़ी, पूर्वी चंपारण (घोड़ासाहन): अनम शेख, महंथ रामजी दास शशि भूषण दास प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय शामिल हैं।

सरकार की पहल से शिक्षक उत्साहित

अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ के नेतृत्व में यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इससे शिक्षकों में कार्य के प्रति प्रतिस्पर्धा और समर्पण की भावना बढ़ी है। शिक्षक अब पढ़ाई में नवाचार और बच्चों के हित में नए प्रयोगों को लेकर ज्यादा सक्रिय हो रहे हैं।

उद्देश्य और प्रभाव

“टीचर ऑफ द मंथ” योजना का उद्देश्य यह है कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।शिक्षकों को पहचान और प्रेरणा मिलेंगी। स्कूली बच्चों को बेहतर शिक्षण अनुभव मिलेगा। इस योजना से बिहार के सरकारी स्कूलों की छवि सुधारने में मदद मिल रही है।

शिक्षा का माहौल सुधारने और शिक्षकों

शिक्षा विभाग की यह पहल बिहार के स्कूलों में शिक्षा का माहौल सुधारने और शिक्षकों के कार्य को पहचान देने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है। इससे न सिर्फ शिक्षकों को सम्मान मिल रहा है बल्कि छात्र-छात्राओं को भी बेहतर शिक्षा का लाभ मिलेगा।

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