वाराणसी। साइबर अपराधियों ने एक बार फिर लोगों को जाल में फंसा कर लाखों रुपये हड़प लिए। ताजा मामलों में युवक को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 80 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए गए, जबकि दूसरे मामले में बैंक खातों से बिना डेबिट कार्ड और ओटीपी के 1.27 लाख रुपये निकाल लिए गए। दोनों घटनाओं की एफआईआर रविवार को थानों में दर्ज कराई गई।
पहला मामला लंका थाना क्षेत्र का है। सीरगोवर्धनपुर निवासी तेज बहादुर ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि एक अगस्त की सुबह 9:30 बजे उनके मोबाइल पर फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके केनरा बैंक खाते में मनी लांड्रिंग का पैसा जमा हुआ है। इस पर उन्हें सख्त कार्रवाई और गिरफ्तारी की धमकी दी गई। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल कर सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट लिखा हुआ फर्जी दस्तावेज भेजकर भरोसा दिलाया गया और बैंक खाते की जांच के नाम पर डराया जाने लगा।
पीड़ित के अनुसार, साइबर जालसाजों ने लगातार दबाव बनाते हुए उनसे यूपीआई ट्रांजैक्शन के जरिए 80 हजार रुपये हेमंत राठौड़ नामक व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर करा लिए। लगभग तीन घंटे तक अलग-अलग तरीकों से पूछताछ और धमकी देकर परेशान किया गया। घटना के 25 दिन बाद, रविवार रात पीड़ित ने लंका थाने में केस दर्ज कराया।
दूसरा मामला साइबर फ्रॉड से खाते से रकम निकाले जाने का है। चोलापुर थाना क्षेत्र के इन्दरखापुर निवासी रितेश गिरी ने शिकायत दर्ज कराई कि 15 अगस्त को उनके बैंक खातों से अचानक रकम निकल गई। उन्होंने बताया कि एसबीआई खाते से 1,14,001 रुपये और आईसीआईसीआई बैंक खाते से 13,992 रुपये बिना किसी डेबिट कार्ड उपयोग और ओटीपी के निकाल लिए गए। इसकी जानकारी उन्हें मोबाइल पर मैसेज आने के बाद हुई। रितेश गिरी का कहना है कि उन्होंने न तो कोई ऑनलाइन लेन-देन किया और न ही बैंक संबंधी जानकारी किसी से साझा की। फिर भी उनके खातों से इतनी बड़ी रकम निकाल ली गई।