पटना/खगड़िया: बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भूमिका और अनुशासन को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्कूल परिसर में रील्स और वीडियो बनाने वाले शिक्षकों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी को रील्स बनानी हैं या सिनेमा की दुनिया में काम करना है, तो उसे थिएटर जॉइन करना चाहिए। स्कूल का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा देना है, न कि वीडियो शूट करना।
खगड़िया में मीडिया से बातचीत के दौरान Bihar Education Minister ने कहा कि शिक्षकों को विद्यालय में अपनी जिम्मेदारी और पद की गरिमा को समझते हुए आना चाहिए। उनके मुताबिक, स्कूल में शिक्षक का पूरा ध्यान पढ़ाई और बच्चों के भविष्य पर होना चाहिए।
शिक्षक के व्यवहार में दिखना चाहिए गुरु का भाव
मिथिलेश तिवारी ने कहा कि एक शिक्षक केवल नौकरी करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। इसलिए शिक्षकों के चेहरे, व्यवहार और कार्यशैली में गुरु जैसा भाव नजर आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब शिक्षक खुद अपनी भूमिका को समझेंगे और आदर्श तरीके से पेश आएंगे, तभी विद्यार्थी भी उन्हें सम्मान के साथ अपना गुरु मानेंगे। शिक्षा मंत्री ने गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई को शिक्षकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि स्कूल में समय का इस्तेमाल बच्चों को पढ़ाने और उनकी शैक्षणिक क्षमता बेहतर बनाने में होना चाहिए।
सम्राट चौधरी के बयान पर दी सफाई
मीडिया से बातचीत के दौरान शिक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अपराध और क्राइम को लेकर दिए गए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुख्यमंत्री की बात को ‘स्लिप ऑफ टंग’ यानी बोलते समय हुई चूक बताया।
मिथिलेश तिवारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री का आशय बिहार में संगठित अपराध को समाप्त करने की बात कहने से था। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया में मुख्यमंत्री के बयान को उसके मूल संदर्भ से अलग करके पेश किया गया।
लालू शासनकाल से की तुलना
शिक्षा मंत्री ने बिहार में संगठित अपराध की स्थिति की तुलना लालू प्रसाद यादव के शासनकाल से भी की। उन्होंने दावा किया कि राज्य में संगठित अपराध पर पहले के मुकाबले नियंत्रण हुआ है।
उनका कहना था कि मुख्यमंत्री की टिप्पणी को उसी संदर्भ में समझा जाना चाहिए, जिसमें वे राज्य में संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहे थे।
शिक्षकों को लेकर दिए गए इस बयान और मुख्यमंत्री के बयान पर सफाई के बाद बिहार की शिक्षा व्यवस्था और राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। Bihar Education Minister की इस टिप्पणी ने एक बार फिर स्कूलों में शिक्षकों के आचरण, सोशल मीडिया गतिविधियों और पढ़ाई के प्रति जवाबदेही का मुद्दा सामने ला दिया है।







